उज्जैन पहुंचे 'ब्लैक पैंथर' मोनू राज चौहान: मां की मन्नत के लिए दौड़कर कर रहे 12 ज्योतिर्लिंग और 4 धाम की यात्रा
मां की जान बचाने की मन्नत पूरी करने के लिए 19 साल के मोनू राज चौहान 'ब्लैक पैंथर' दौड़कर कर रहे 12 ज्योतिर्लिंग और 4 धाम की यात्रा। उज्जैन पहुंचे मोनू।
उज्जैन: एक मां की जिंदगी बचाने के लिए भगवान से मांगी गई मन्नत आज 19 साल के बेटे की ऐसी असाधारण यात्रा बन चुकी है, जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। यह प्रेरणादायक कहानी बिहार के पटना जिले के फुलवारी शरीफ प्रखंड की ग्राम पंचायत चिल्बिलि के गांव बेउर बेतोरा में रहने वाले मोनू राज चौहान उर्फ 'ब्लैक पैंथर' की है। करीब 6 साल पहले जब उनकी मां लालती देवी के गले में मछली का कांटा फंस गया था, तब पूरे परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था। मां के इलाज में 10 लाख रुपए से अधिक खर्च हुए थे। उस समय महज 13 वर्ष की आयु के छोटे से मोनू ने गांव से लगभग 50 किलोमीटर दूर जहानाबाद के बराबर पहाड़ स्थित बाबा सिद्धेश्वर नाथ के दरबार में माथा टेककर यह मन्नत मांगी थी कि यदि उनकी मां स्वस्थ हो गईं, तो वह दौड़कर 12 ज्योतिर्लिंग और 4 धाम के दर्शन करेंगे। आज वह अपने इसी कठिन संकल्प को पूरी निष्ठा के साथ पूरा कर रहे हैं।
⏱️ रोजाना 40 से 50 किलोमीटर दौड़; 11 घंटे सड़क पर बिताते हैं मोनू
कठिन दिनचर्या और सफर:
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दैनिक शेड्यूल: मोनू की यह यात्रा कोई आम तीर्थयात्रा नहीं है, बल्कि वह रोज लगभग 40 से 50 किलोमीटर की दूरी दौड़कर तय करते हैं। मोनू बताते हैं कि वह सुबह 8:00 से 9:00 बजे के बीच अपनी यात्रा शुरू करते हैं और इस सफर को पूरा करने में उन्हें रोजाना लगभग 11 घंटे लग जाते हैं।
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अब तक का सफर: बिहार से शुरू हुआ उनका यह सफर अब तक 9 राज्यों से गुजर चुका है। उज्जैन पहुंचने से पहले वह 7 ज्योतिर्लिंग और 2 धाम के दर्शन कर चुके हैं। हर ज्योतिर्लिंग या धाम पहुंचने पर वह दो से तीन दिन रुककर दर्शन करते हैं और शरीर को विश्राम देते हैं। उनका मुख्य लक्ष्य 9 महीने के भीतर काशी विश्वनाथ पहुंचना है।
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उज्जैन आगमन: मोनू 4 नवंबर की रात को उज्जैन पहुंचे। 5 नवंबर को उन्होंने दिनभर उज्जैन शहर में समर्थकों से मुलाकात की और दौड़ लगाई। इसके बाद 6 नवंबर को महाकाल की प्रसिद्ध भस्म आरती में दर्शन किए और 7 नवंबर को अपने अगले पड़ाव गुजरात स्थित सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के लिए रवाना होंगे।
🏏 क्रिकेटर बनने का था सपना; पारिवारिक परिस्थितियों ने बदली राह
परिवार और पृष्ठभूमि:
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पारिवारिक स्थिति: मोनू क्रिकेट खेलने के शौकीन हैं और परिवार में सबसे छोटे बेटे हैं। उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई की है और उनका सपना क्रिकेट में आगे बढ़ने का था, लेकिन पारिवारिक आर्थिक तंगी और मां की बीमारी के चलते उन्हें अपना यह सपना छोड़ना पड़ा।
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माता-पिता का साथ: उनके पिता महेश चौहान एक इलेक्ट्रीशियन हैं और भाई सोनू भी काम करते हैं। शुरुआत में पिता को बेटे की सुरक्षा की बहुत चिंता थी और वे इस यात्रा के खिलाफ भी थे, लेकिन जब उन्होंने सोशल मीडिया पर बेटे के वीडियो देखे और देश भर से मिल रहा अपार समर्थन देखा, तो उनकी चिंता गर्व में बदल गई।
📱 सोशल मीडिया पर बने 'ब्लैक पैंथर'; 23 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स
डिजिटल पहचान और लोकप्रियता:
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फॉलोअर्स का आंकड़ा: मोनू की यह यात्रा जितनी जमीन पर अनोखी है, उतनी ही सोशल मीडिया पर भी छा चुकी है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक तीनों प्लेटफॉर्म्स को मिलाकर उनके 23 लाख से अधिक फॉलोअर्स और सब्सक्राइबर्स हो चुके हैं, और उनके वीडियो पर करोड़ों व्यूज आते हैं।
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पहचान: उनकी लंबी बाल रखने की शैली, पीली बनियान और हाफ लोअर वाला साधारण पहनावा अब उनकी खास पहचान बन चुका है, जिसके चलते लोग उन्हें प्यार से 'ब्लैक पैंथर' पुकारते हैं। उनकी इस यात्रा में अब रास्ते से कई अन्य युवा भी जुड़कर उनका साथ दे रहे हैं।
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