शरजील इमाम के बाद उमर खालिद ने भी दाखिल की जमानत याचिका, लंबे समय से हैं जेल में बंद
दिल्ली दंगा साजिश मामले में उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की जमानत याचिका। लंबे समय से जेल में बंद होने और गवाही में देरी का दिया हवाला।
दिल्ली दंगा कथित साजिश मामले में आरोपी छात्र कार्यकर्ता शरजील इमाम के बाद अब जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के पूर्व छात्र उमर खालिद ने भी जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने दोनों को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया था। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, उमर खालिद ने अपनी जमानत याचिका में मुख्य तर्क दिया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत के लिए अपील दायर करने पर लगाई गई एक साल की रोक की अवधि अब समाप्त होने वाली है। इसके साथ ही याचिका में यह भी कहा गया है कि अभियोजन पक्ष द्वारा संरक्षित गवाहों से आगामी 5 जनवरी 2027 तक गवाही पूरी करवाना संभव नजर नहीं आ रहा है, इसलिए लंबे समय से बतौर विचाराधीन कैदी जेल में बंद होने के चलते उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।
⏱️ सुप्रीम कोर्ट की 'जो भी पहले हो' वाली शर्त और जनवरी 2027 की डेडलाइन
याचिका के मुख्य बिंदु और शर्तें:
-
आरोप तय न होना: उमर खालिद की ओर से कहा गया है कि अभी तक मामले में आरोप (Charges) भी तय नहीं किए जा सके हैं और न ही अभियोजन पक्ष गवाहों से गवाही दर्ज करा सका है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश की 'जो भी पहले हो' वाली शर्त के 5 जनवरी 2027 के भीतर पूरी होने की कोई उम्मीद नहीं है।
-
पिछला आदेश: इसी साल 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया) ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी खारिज करते हुए उन्हें कथित दंगा साजिश का वैचारिक सूत्रधार बताया था। साथ ही यह शर्त रखी थी कि आवेदक संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने या आदेश की तारीख से एक साल की अवधि पूरी होने (इनमें से जो भी पहले हो) के बाद ही दोबारा जमानत के लिए अपील दायर कर सकेंगे।
🔄 शरजील इमाम का भी मिलता-जुलता तर्क; हाईकोर्ट ने हाल ही में खारिज की थी याचिका
अदालत की पिछली कार्रवाई और अन्य आरोपियों का पक्ष:
-
शरजील इमाम की दलीलें: सह-आरोपी शरजील इमाम ने भी अपनी सुप्रीम कोर्ट की जमानत याचिका में लगभग ऐसे ही तर्क दिए हैं। उन्होंने अदालत को बताया है कि वे बतौर विचाराधीन कैदी 6 साल और 9 महीने से अधिक समय से जेल में काट चुके हैं और अभियोजन पक्ष द्वारा अब तक एक भी संरक्षित गवाह की गवाही नहीं कराई गई है।
-
हाईकोर्ट का फैसला: इस मामले में गत 30 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की बेंच ने जमानत अपील खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि वे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश में अपनी तरफ से कोई बदलाव नहीं कर सकते।
🚨 फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की पृष्ठभूमि
घटना का संक्षिप्त इतिहास:
-
भीषण हिंसा: गौरतलब है कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में बड़े पैमाने पर दंगे भड़क उठे थे, जिसमें 53 लोगों की जान चली गई थी और 700 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
-
वजह: यह हिंसा मुख्य रूप से नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और एनआरसी (NRC) के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के दौरान उपजी थी, जिसकी साजिश के आरोप में कई छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
Comments (0)