ऊर्जा क्षेत्र में एमपी की बड़ी छलांग: गांधी सागर डैम पर तैयार हुआ मेगा प्रोजेक्ट, सीएम मोहन यादव ने दी जानकारी
मध्य प्रदेश के नीमच में गांधी सागर डैम पर तैयार हुआ एशिया का सबसे बड़ा हाइड्रो पावर प्लांट। 6000 करोड़ की लागत से मार्च तक 2000 मेगावाट बिजली का होगा उत्पादन।
ऊर्जा के क्षेत्र में मध्य प्रदेश अब तेज गति से आगे बढ़ रहा है। विभिन्न सेक्टरों में भारी-भरकम निवेश के साथ अब प्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) आधारित हाइड्रो पावर जनरेशन में भी एक लंबी छलांग लगाई है। नीमच जिले में गांधी सागर डैम पर 6000 करोड़ रुपये की लागत से एशिया का सबसे बड़ा हाइड्रो पावर प्लांट बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है, जिससे आगामी मार्च महीने तक 2000 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू हो जाएगा।
🏔️ गांधी सागर डैम पर तैयार हुई परियोजना; मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी जानकारी
परियोजना का महत्व और विजन:
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ऊर्जा क्षमता में विस्तार: मध्य प्रदेश लगातार अपनी ऊर्जा क्षमता का विस्तार करते हुए औद्योगिक क्षेत्रों की बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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मुख्यमंत्री का बयान: इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मेगा प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हाइड्रो पावर प्लांट की यह परियोजना प्रदेश की ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे राष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई पहचान मिलेगी।
💰 6 हजार करोड़ की लागत और टरबाइन शुरू होने की समय-सीमा
उत्पादन और क्षमता के आंकड़े:
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बड़ी उपलब्धि: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 6 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार यह प्लांट देश और प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
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शुरुआत और टरबाइन: इस परियोजना की एक टरबाइन इसी दिसंबर माह से प्रारंभ कर दी जाएगी। लगभग 2000 मेगावाट क्षमता वाला यह हाइड्रो पावर प्लांट मार्च तक पूरी तरह से क्रियाशील हो जाएगा, जो उद्योग जगत के सभी सेक्टरों के लिए वरदान साबित होगा।
🔄 पानी को बार-बार सर्कुलेट कर बनेगी बिजली; पर्यावरण अनुकूल तकनीक
विशेष तकनीकी विशेषताएं:
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री-सर्कुलेटिंग तकनीक: यह परियोजना पारंपरिक हाइड्रो पावर प्लांटों से काफी अलग और आधुनिक है। इसमें एक ही पानी को बार-बार री-सर्कुलेट करके बिजली का उत्पादन किया जाएगा, जिससे पानी की एक भी बूंद व्यर्थ नहीं होगी।
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पंप-स्टोरेज मैकेनिज्म: दिन के समय जब सौर ऊर्जा (Solar Energy) प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होगी, तब बड़े मोटर पंपों के माध्यम से निचले जलाशय का पानी 31 मीटर ऊंचे पहाड़ पर बने ऊपरी बांध में स्टोर किया जाएगा और जरूरत के वक्त टरबाइन चलाकर बिजली बनाई जाएगी।
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