गुजरात-महाराष्ट्र तक के भक्त पहुंचते हैं बुरहानपुर, जानिए क्या है इस दुर्लभ दर्शन की मान्यता
बुरहानपुर के 200 साल पुराने स्वामीनारायण मंदिर में धनतेरस पर माता लक्ष्मी के दुर्लभ चरणों के दर्शन। साल में एक बार मिलने वाले इस कुमकुम के दर्शन के लिए उमड़े भक्त।
देशभर में कई ऐसे प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर हैं, जो अपनी अनूठी मान्यताओं और परंपराओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर में भी एक ऐसा ही खास मंदिर स्थित है, जो अपनी अनोखी विशेषताओं के लिए विशेष महत्व रखता है। सिलमपुरा क्षेत्र में बने करीब 200 साल पुराने श्री स्वामीनारायण मंदिर में धनतेरस के पावन पर्व पर भक्तों को माता लक्ष्मी के दुर्लभ और अलौकिक दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है। यहाँ साल में केवल एक ही दिन माता लक्ष्मी के कुमकुम से भरे चरणों के दर्शन कराए जाते हैं।
💰 सालभर ढंके रहते हैं चरण; भक्त कुमकुम को घर की तिजोरी और देवघर में करते हैं स्थापित
दर्शन की मान्यता और परंपरा:
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विशेष पूजन व आरती: मंदिर में स्वामीनारायण संप्रदाय के महंत और हरिभक्तों द्वारा विशेष पूजन व महाआरती का आयोजन किया जाता है। धनतेरस की सुबह माता के कुमकुम से सजे चरणों के दर्शन के लिए मंदिर के द्वार खोल दिए जाते हैं।
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भक्तों का तांता: इस दुर्लभ अवसर पर दर्शन करने के लिए मध्य प्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्यों जैसे गुजरात और महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुरहानपुर पहुँचते हैं।
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तिजोरी में कुमकुम रखना: दर्शन के उपरांत माता लक्ष्मी जी के चरणों का यह पवित्र कुमकुम भक्त अपने साथ अपने घर ले जाते हैं। मान्यता है कि इस कुमकुम को घर की तिजोरी या पूजा घर (देवघर) में रखने से सालभर परिवार में सुख-शांति, बरकत और आर्थिक समृद्धि बनी रहती है।
🏛️ 200 साल पुरानी अनूठी परंपरा का निर्वहन; सालभर वस्त्रों से ढंके रहते हैं चरण
श्रद्धालुओं की आस्था और मंदिर का इतिहास:
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वस्त्रों से आच्छादित रूप: श्री स्वामीनारायण मंदिर में साल के बाकी 364 दिन माता लक्ष्मी के चरणों को विशेष वस्त्रों और साड़ी से ढंककर रखा जाता है। केवल धनतेरस के एक दिन ही भक्तों को लक्ष्मीजी के इन दुर्लभ चरणों के दर्शन का लाभ मिलता है।
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श्रद्धालुओं का उत्साह: इस एक दिन के दर्शन के लिए भक्तों में भारी उत्साह रहता है। सुबह से ही मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लग जाती हैं। कई स्थानीय भक्त नियमित रूप से यहाँ आते हैं, जबकि दूर-दूर के श्रद्धालु सिर्फ धनतेरस के अवसर पर ही विशेष रूप से हाजिरी लगाने आते हैं।
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भक्तों के अनुभव: स्थानीय श्रद्धालु नेंद्र मोदी ने बताया कि इस मंदिर में करीब 200 सालों से इस अनोखी परंपरा का पूरी निष्ठा से निर्वहन किया जा रहा है। यहाँ माता लक्ष्मी की प्रतिमा विराजित है, और धनतेरस पर चरणों के दर्शन मात्र से भक्तों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
🌿 शास्त्री चिंतनदास प्रियदास के अनुसार सालभर बनी रहती है माता लक्ष्मी की कृपा
मंदिर के संतों के विचार: श्री स्वामीनारायण मंदिर के शास्त्री चिंतनदास प्रियदास ने जानकारी देते हुए बताया कि धनतेरस के इस अत्यंत शुभ और पवित्र दिन मंदिर में आने वाले सभी श्रद्धालुओं को माता लक्ष्मी के कुमकुम से भरे चरणों के दर्शन कराए जाते हैं। दूर-राज्यों से आने वाले इन भक्तों पर सालभर धन, वैभव, सुख और समृद्धि की निरंतर बरसात होती रहती है।
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