उज्जैन का अनोखा मंदिर: 40 लाख रुपए के नोटों से सजा मां गजलक्ष्मी का गर्भगृह, 2000 साल पुरानी है परंपरा
उज्जैन के प्राचीन मां गजलक्ष्मी मंदिर में 40 लाख रुपए के नोटों से सजावट। 2000 साल पुरानी परंपरा, 5100 लीटर दूध से अभिषेक और मंदिर की खासियतों की पूरी खबर।
महाकाल की पावन नगरी उज्जैन में आस्था, इतिहास और संस्कृति का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलता है, जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। शहर के नई पैठ क्षेत्र में स्थित अति प्राचीन मां गजलक्ष्मी मंदिर में 5 दिवसीय दीपोत्सव पर्व के दौरान धन, वैभव और समृद्धि की देवी का बेहद भव्य दरबार सजाया गया है। इस बार मंदिर के गर्भगृह को करीब 40 लाख रुपए के नोटों से अलौकिक ढंग से सजाया गया है। इसके अलावा दीपावली के पावन पर्व पर 5100 लीटर दूध से माता का विशेष महाभिषेक किया जाएगा। सफेद ऐरावत हाथी पर विराजमान मां गजलक्ष्मी की इस दुर्लभ और ऐतिहासिक प्रतिमा को लेकर मंदिर प्रबंधन देश में इस तरह की एकमात्र प्रतिमा होने का दावा करता है।
👑 राजा विक्रमादित्य के काल से जुड़ी दो हजार साल पुरानी परंपरा; कहलाई जाती हैं राजलक्ष्मी
ऐतिहासिक मान्यता और स्वरूप:
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विक्रमादित्य का आह्वान: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सम्राट विक्रमादित्य ने उज्जैन को हमेशा धन-धान्य और वैभव से परिपूर्ण बनाए रखने के लिए मां गजलक्ष्मी का आह्वान किया था। जब माता प्रकट हुईं, तो उनसे नगरी में स्थाई रूप से निवास करने का वरदान मांगा गया था।
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राजलक्ष्मी स्वरूप: इसी प्राचीन मान्यता के चलते मां गजलक्ष्मी को 'विक्रमादित्य की राजलक्ष्मी' कहा जाता है। मंदिर के मुख्य पुजारी अवधेश शर्मा के अनुसार, इस मंदिर और प्रतिमा की परंपरा लगभग 2000 से 2500 वर्ष पुरानी है।
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ऐरावत हाथी पर विराजित प्रतिमा: समुद्री पाषाण (स्फटिक) से निर्मित इस दुर्लभ प्रतिमा में माता लक्ष्मी सफेद ऐरावत हाथी पर बने रथ में पद्मासन मुद्रा में विराजित हैं। आमतौर पर मां लक्ष्मी के साथ उल्लू का स्वरूप देखने को मिलता है, लेकिन यहां हाथी पर विराजमान स्वरूप होने के कारण यह देश की एकमात्र अनूठी प्रतिमा मानी जाती है।
🏛️ भगवान विष्णु के दशावतारों के दर्शन कराती काले पाषाण की प्राचीन और कलात्मक प्रतिमा
मंदिर की अन्य विशेषताएं:
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विष्णु-दशावतार शिल्पांकन: इस मंदिर की भव्यता केवल मां गजलक्ष्मी तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां काले पाषाण से निर्मित भगवान विष्णु की अत्यंत प्राचीन और कलात्मक प्रतिमा भी स्थापित है।
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दिव्य स्वरूप: पुजारी अवधेश शर्मा बताते हैं कि इस प्रतिमा में भगवान विष्णु के दशावतारों के दर्शन होते हैं। साथ ही पार्षद, जय-विजय, शंख-चक्र धारण किए हुए स्वरूप और अन्य देवी-देवताओं का सुंदर शिल्पांकन भी देखने को मिलता है। इसके अलावा मंदिर में गरुड़ पर विराजित लक्ष्मी-नारायण और ऊपर के हिस्से में ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश से जुड़े स्वरूप भी अंकित हैं।
💰 40 लाख रुपए के नोटों से सजा गर्भगृह; व्यापारियों के लिए है विशेष आस्था का केंद्र
दीपोत्सव के विशेष आयोजन और सुरक्षा:
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व्यापारियों के बही-खाते: धार्मिक परंपराओं में गजलक्ष्मी को ऐश्वर्य, राजसत्ता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। व्यापारियों के बीच इस मंदिर का विशेष महत्व है, और दीपावली के इन दिनों में देश-विदेश के कई व्यापारी अपने बही-खाते पूजन के लिए यहाँ भेजते हैं।
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नोटों की सजावट: गर्भगृह को सजाने के लिए उपयोग किए जाने वाले 40 लाख रुपए के विभिन्न मूल्य वर्ग के नोट व्यापारियों और दानदाताओं द्वारा उपलब्ध कराए जाते हैं। पर्व समाप्त होने के बाद ये नोट संबंधित दानदाताओं को वापस लौटा दिए जाते हैं।
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सुरक्षा के कड़े इंतजाम: इतनी बड़ी राशि और नोटों की सजावट को देखते हुए मंदिर परिसर में पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ सीसीटीवी कैमरों और अन्य उन्नत सुरक्षा उपकरणों के विशेष प्रबंध किए गए हैं।
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