Tiger Yuvraj Rescue: खिवनी में दो बाघों के बीच वर्चस्व की जंग; 10 साल के दबदबे के बाद टाइगर युवराज सुरक्षित भोपाल शिफ्ट
खिवनी अभयारण्य में टाइगर युवराज और अधिराज के बीच वर्चस्व की लड़ाई। घायल युवराज को रेस्क्यू कर भोपाल शिफ्ट किया गया। जानें जंगल के इस संघर्ष की पूरी कहानी।
देवास। खिवनी अभयारण्य के जंगलों में इन दिनों वर्चस्व की जंग चर्चा का विषय बनी हुई है। पिछले एक दशक से जंगल के 'अल्फा मेल' रहे टाइगर युवराज का दबदबा अब युवा टाइगर अधिराज ने खत्म कर दिया है। दोनों बाघों के बीच हुए भीषण खूनी संघर्ष में युवराज बुरी तरह घायल हो गया है। एक पर्यटक द्वारा खींची गई घायल बाघ की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसके बाद वन विभाग की टीम सक्रिय हुई।
🏥 4 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन: भोपाल शिफ्ट हुआ घायल 'युवराज'
फारेस्ट ऑफिसर भीम सिंह के अनुसार, इस संघर्ष में युवराज के पंजों और पैरों पर गहरे घाव आए हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने उसकी खोजबीन शुरू की और करीब 4 घंटे के कठिन रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे सुरक्षित भोपाल शिफ्ट कर दिया गया। खास बात यह है कि इस रेस्क्यू में हाथियों की मदद उपलब्ध नहीं थी, बावजूद इसके वन विहार भोपाल के डॉ. अतुल गुप्ता और उनकी टीम ने जोखिम उठाकर बाघ को ट्रेंक्विलाइज किया।
🐅 क्यों होती है बाघों में ऐसी लड़ाई?
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट प्रमोद ने बताया कि जंगल में 'टेरिटोरियल फाइट' एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। आमतौर पर 10 साल की उम्र के बाद पुराने अल्फा मेल का दबदबा कम होने लगता है और 4-5 साल के युवा बाघ उन्हें चुनौती देने लगते हैं। बाघ लड़ाई में एक-दूसरे के पंजों को निशाना बनाते हैं ताकि प्रतिद्वंद्वी शिकार करने में अक्षम हो जाए। हारने वाले बाघ को अपना इलाका छोड़ना पड़ता है और विजेता बाघ वहां अपने निशान छोड़कर अपना वर्चस्व स्थापित करता है।
🌟 खिवनी को नई पहचान दिलाने वाला 'युवराज'
टाइगर युवराज को खिवनी अभयारण्य में 7 बाघों के कुनबे का जनक माना जाता है। युवराज ने ही इस अभयारण्य को एक नई पहचान दिलाई थी, जिससे वहां के पर्यटन में काफी वृद्धि हुई थी। खिवनी के लिए युवराज का योगदान अतुलनीय रहा है। वर्तमान में युवराज का इलाज भोपाल के वन विहार में चल रहा है, जहाँ विशेषज्ञ उसकी रिकवरी पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।
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