मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने की इंदौर के SIR अभियान की सराहना; कहा- 'मध्यप्रदेश का मॉडल देश के लिए आदर्श'
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इंदौर में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) अभियान की तारीफ की। जानें मध्यप्रदेश के चुनाव मॉडल और बीएलओ संवाद की मुख्य बातें।
इंदौर। भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने शनिवार को इंदौर का दौरा किया। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और परिशोधन कार्य में मध्यप्रदेश द्वारा अपनाई गई पारदर्शिता की मुक्तकंठ से सराहना की। आयुक्त ने कहा कि जिस गुणवत्ता और दक्षता के साथ मध्यप्रदेश में मतदाता सूची को शुद्ध किया गया है, वह अन्य राज्यों के लिए एक दुर्लभ उदाहरण है। उन्होंने इस बात पर गर्व जताया कि भारत की चुनावी प्रणाली आज विश्व में सबसे विश्वसनीय मानी जाती है, जिसके परिणामस्वरूप भारत 'इंटरनेशनल आइडिया' (International IDEA) की अध्यक्षता कर रहा है।
🔍 शुद्ध मतदाता सूची पर आयोग का फोकस
कार्यक्रम के दौरान आयुक्त ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे और किसी अपात्र का नाम सूची में न जुड़े। एसआईआर अभियान के तहत मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट नामों को हटाकर सूची को त्रुटिहीन बनाया गया है। उन्होंने ईसीआई नेट ऐप (ECI Net App) के डिजिटल नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि इसने बीएलओ और मतदाताओं के बीच संवाद को और अधिक सुदृढ़ किया है। इस दौरान उन्होंने 'कॉफी टेबल बुक' का विमोचन भी किया।
📊 इंदौर में बड़े पैमाने पर शुद्धि अभियान
इंदौर की नौ विधानसभा क्षेत्रों में चले इस महा-अभियान के आंकड़े काफी प्रभावशाली रहे हैं। जिले में 28.67 लाख से अधिक मतदाताओं के आवेदन बीएलओ द्वारा भरे गए थे। गहन जांच के बाद 4.47 लाख अपात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए और 6.67 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी कर दस्तावेजों का सत्यापन किया गया।
💬 बीएलओ के साथ सीधा संवाद
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बीएलओ के साथ संवाद में उनके महत्वपूर्ण सुझावों पर भी चर्चा की:
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आधार की अनिवार्यता: आयुक्त ने स्पष्ट किया कि आधार न तो जन्म का प्रमाण है और न ही नागरिकता का, इसलिए इसे अनिवार्य नहीं किया जा सकता।
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सूची का एकीकरण: स्थानीय और केंद्रीय मतदाता सूची को एक न किए जाने के सवाल पर उन्होंने बताया कि दोनों चुनाव प्रक्रियाओं के संवैधानिक विधान अलग-अलग हैं, इसलिए इन्हें जोड़ा नहीं जा सकता।
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