दिल्ली की सरकारी नौकरी छोड़ शुरू की बांस की खेती; नीमच के किसान का खेत बना कमाई का जरिया

सरकारी नौकरी छोड़ बांस की खेती करने वाले नीमच के किसान कमलाशंकर ने रचा इतिहास। औषधीय फसल और खेत को टूरिस्ट स्पॉट बनाकर कमा रहे हैं लाखों।

Jul 10, 2026 - 10:06
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दिल्ली की सरकारी नौकरी छोड़ शुरू की बांस की खेती; नीमच के किसान का खेत बना कमाई का जरिया

नीमच। आमतौर पर लोग खेती छोड़कर नौकरी की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं, लेकिन नीमच के मनासा तहसील स्थित भाटखेड़ी गांव के किसान कमलाशंकर विश्वकर्मा ने इसके उलट एक मिसाल कायम की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में सलाहकार के पद पर कार्यरत कमलाशंकर ने कोरोना काल में नौकरी छोड़कर अपने गांव लौटने का साहसी फैसला लिया और एक हेक्टेयर जमीन पर बांस की खेती शुरू की।

🌿 नवाचार का कमाल: बांस के साथ औषधीय फसलों का मेल

कमलाशंकर ने पारंपरिक खेती से हटकर बांस की खेती में नवाचार किया। उन्होंने बांस के पौधों के बीच पर्याप्त जगह छोड़कर पहले दो साल अश्वगंधा और उसके बाद शतावरी की फसल लगाई। खेती के इस वैज्ञानिक तरीके से उन्हें न केवल बांस से भविष्य की कमाई का जरिया मिला, बल्कि औषधीय फसलों से भी लाखों का मुनाफा हुआ। आज वे बांस, औषधीय पौधों और टूरिज्म के जरिए सालाना 7 से 8 लाख रुपये तक की कमाई कर रहे हैं।

📸 खेत बना टूरिस्ट और शूटिंग स्पॉट

कमलाशंकर ने अपनी मेहनत से खेत को एक खूबसूरत पर्यटन स्थल का रूप दे दिया है। उनके खेत को देखने के लिए लोग 50 रुपये का शुल्क देते हैं। इसके अलावा, प्रकृति की गोद में प्री-वेडिंग, मैटरनिटी शूट और वीडियोग्राफी के लिए भी लोग यहां आते हैं, जिसके लिए वे 2100 रुपये का शुल्क लेते हैं। यह खेत अब आसपास के जिलों के लिए एक प्रमुख पिकनिक स्पॉट बन चुका है।

🏅 शासन-प्रशासन द्वारा प्राप्त राष्ट्रीय सम्मान

कमलाशंकर की मेहनत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। उन्हें 2025 में ग्वालियर के कृषि विश्वविद्यालय द्वारा 'कृषक फैलो सम्मान 2024' और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर "प्रो. रतनलाल अवॉर्ड्स फॉर एक्सीलेंस इन रिजनरेटिव एग्रीकल्चर 2025" से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2026 में उन्हें उज्जैन में 'अनसंग एवरीडे हीरोज़ अवॉर्ड' से भी नवाजा गया। उनकी यह सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कृषि के क्षेत्र में नए अवसर तलाश रहे हैं।

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