एमपी में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था! सेसईपुरा में बंद मिला प्रसव केंद्र, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
श्योपुर जिले के सेसईपुरा में प्रसव केंद्र पर ताला लटका मिलने के कारण प्रसूता को ट्रैक्टर ट्रॉली में बच्चे को जन्म देना पड़ा। वीडियो वायरल होने पर हड़कंप।
श्योपुर। प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में बेहतर एवं सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के तमाम बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन श्योपुर जिले के कराहल ब्लॉक से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने इन सभी दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
श्योपुर जिले के सेसईपुरा स्थित शासकीय प्रसव केंद्र पर ताला लटका मिलने के कारण प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक महिला को मजबूरन ट्रैक्टर-ट्रॉली में ही अपने बच्चे को जन्म देना पड़ा। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिले की कलेक्टर लगातार आदिवासी बहुल क्षेत्रों का भ्रमण करती हैं, इसके बावजूद मैदानी अधिकारी-कर्मचारी बेखौफ और बेलगाम बने हुए हैं।
🚑 डिलीवरी के बाद बुलाई गई एंबुलेंस: जच्चा-बच्चा को कराया गया कराहल अस्पताल में भर्ती
ट्रैक्टर-ट्रॉली में ही नवजात का जन्म हो जाने के बाद आनन-फानन में परिजनों ने 108 एंबुलेंस को सूचना दी।
एंबुलेंस पहुंचने के बाद प्रसूता और नवजात शिशु को तुरंत कराहल स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले जाकर भर्ती कराया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार जारी है। सेसईपुरा निवासी ग्रामीण देवेंद्र का आरोप है कि सेसईपुरा का यह प्रसव केंद्र लंबे समय से बंद पड़ा रहता है। आसपास के कई गांवों की महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए यह केंद्र खोला गया था, लेकिन यहां पदस्थ स्टाफ कभी ड्यूटी पर नहीं आता, जिससे ग्रामीणों को आए दिन भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मामले में जब सीएमएचओ (CMHO) डॉ. दिलीप सिंह सिकरवार से बात की गई, तो उन्होंने अनभिज्ञता जताते हुए जांच के बाद सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
🏥 छतरपुर, छिंदवाड़ा और मंडला से भी आ चुकी हैं ऐसी तस्वीरें: समय पर इलाज न मिलने से उजड़ रहीं गोदें
मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से लगातार स्वास्थ्य तंत्र की बदहाली और लापरवाही की खबरें सामने आ रही हैं।
इससे पहले छतरपुर, मंडला और छिंदवाड़ा में भी ऐसी ही अमानवीय घटनाएं घटित हो चुकी हैं। हाल ही में छतरपुर जिला अस्पताल में समय पर इलाज और बेड न मिलने के कारण प्रसूता आरती पटेल को सड़क पर ही बच्चे को जन्म देना पड़ा था, जिसकी गर्भ में ही मौत हो चुकी थी। परिजनों ने आरोप लगाया था कि सोनोग्राफी सेंटर पर 1,000 रुपये जमा करने के बावजूद भी उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल सका था।
🛣️ छिंदवाड़ा और मंडला में भी रास्ते में हुई थी डिलीवरी: कहीं सड़क न होने तो कहीं इलाज न मिलने से हुई मौतें
इसी तरह छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव विकासखंड के गोपतराई गांव में कच्ची सड़क और वाहन की सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों ने एक प्रसूता को कपड़े की डोली में लादकर सुबह-सुबह अस्पताल पहुंचाया था, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही नवजात की मौत हो चुकी थी।
वहीं, मंडला जिले के बिछिया (नवगांवा) से सामने आए एक अन्य मामले में समय पर एंबुलेंस और स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा न मिलने पर रास्ते में हुई प्री-मैच्योर डिलीवरी के दौरान एक साथ जन्मे चार नवजातों की मौत हो गई थी। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि राज्य के दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं किस कदर बेपटरी हो चुकी हैं।
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