सरकारी स्कूल से पढ़कर गुजरात की सेमीकंडक्टर कंपनी तक पहुंची शिवानी; पीएम मोदी ने की जमकर तारीफ
बालाघाट के अरंडिया गांव की शिवानी उईके ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हासिल की बड़ी कामयाबी। पीएम नरेंद्र मोदी ने सीधे संवाद कर शिवानी की लगन और प्रतिभा को सराहा।
बालाघाट । आदिवासी बाहुल्य परसवाड़ा क्षेत्र के ग्राम अरंडिया की एक बेटी ने जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सेमीकंडक्टर उद्योग पर सीधे संवाद किया, तो पीएम मोदी भी उसकी तारीफ किए बिना नहीं रह सके। प्रधानमंत्री ने बेटी के हौसलों की उड़ान देख उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा, "अवसर मिला है, खूब प्रगति कीजिए।" विशेष बात यह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संवाद की शुरुआत आत्मीयता के साथ 'जय जोहार' कहकर की।
💼 सरकारी स्कूल से सफर शुरू, गुजरात की सेमीकंडक्टर कंपनी में मिली जॉब
बालाघाट निवासी शिवानी उईके की इस सफलता ने न केवल उसके सपनों को पंख लगाए हैं, बल्कि उसके माता-पिता सहित समूचे जिले को गौरवान्वित किया है। शिवानी की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल से हुई थी। इसके बाद शिवानी ने महिला आजीविका मिशन के मार्गदर्शन में धार जिले के आईटीआई (ITI) में दाखिला लिया। यहां उनकी मेहनत, लगन और साहस रंग लाया और उन्हें गुजरात की प्रतिष्ठित सेमीकंडक्टर कंपनी में जॉब करने का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ।
🎓 सीमित संसाधनों को बनाया हथियार, कॉलेज में रहीं टॉपर
अपनी चुनौतियों को साझा करते हुए शिवानी ने बताया कि घर से दूर रहकर पढ़ाई करना आसान नहीं था। सीमित संसाधनों में जीवन गुजारना बेहद मुश्किल था, लेकिन उन्होंने धैर्य और अनुशासन के साथ कड़ी मेहनत को अपना हथियार बनाया। इसी का परिणाम रहा कि वे अपने कौशल कॉलेज (कौशल विकास केंद्र) में टॉपर रहीं। प्रशिक्षण पूरा होते ही शिवानी का चयन गुजरात (अहमदाबाद) की प्रतिष्ठित सेमीकंडक्टर कंपनी के लिए हो गया, जहां उन्हें देश के प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी प्रतिभा दिखाने का गौरवशाली अवसर मिला।
🤝 पीएम मोदी ने दिया तरक्की का मंत्र, माता-पिता की भूमिका को सराहा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात की इस बहुप्रतिष्ठित सेमीकंडक्टर कंपनी के दौरे पर पहुंचे थे, तब उन्होंने वहां कार्यरत युवाओं से बातचीत की। इस दौरान पीएम ने शिवानी और अन्य बच्चों से संवाद करते हुए उन्हें जीवन में निरंतर उत्तरोत्तर प्रगति करने का मंत्र दिया। शिवानी के पिता रमेश उईके एक छोटे किसान हैं और माता विमला उईके एक कुशल गृहणी होने के साथ स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं। दोनों ने तमाम अभावों के बावजूद बेटी की पढ़ाई में कभी कोई बाधा नहीं आने दी।
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