₹13 हजार से सीधे ₹9 हजार पर आए डॉलर चने के भाव! जानिए क्यों घाटे में हैं मालवा-निमाड़ के किसान
अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण समुद्री मार्ग प्रभावित होने से मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ का प्रसिद्ध डॉलर चना (काबुली चना) एक्सपोर्ट नहीं हो पा रहा है। उज्जैन में 30 हजार क्विंटल चना फंसा है और भाव ₹3,000 प्रति क्विंटल गिर चुके हैं।
उज्जैन। कभी मध्य प्रदेश के किसानों और व्यापारियों के लिए सबसे मुनाफे का सौदा माना जाने वाला 'डॉलर चना' (काबुली चना) इस सीजन भारी संकट के दौर से गुजर रहा है. मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिसके चलते डॉलर चने की विदेशी सप्लाई लगभग ठप पड़ गई है.
नतीजतन, मध्य प्रदेश के मालवा और निमाड़ अंचल में बड़े पैमाने पर पैदा होने वाला प्रीमियम काबुली चना मंडियों से बंदरगाहों और विदेशी बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहा है तथा व्यापारियों व कोल्ड स्टोरेज के गोदामों में ही अटका पड़ा है.
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग रुकने से डॉलर चने की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है. जिस बड़े दाने वाले प्रीमियम डॉलर चने के भाव पिछले सीजन में 12,000 से 13,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचे थे, वह इस बार मंडियों में 9,000 से 9,500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है.
इसी प्रकार छोटा काबुली चना भी 6,000 रुपये के स्थान पर 5,000 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे आ गया है. कीमतों में आई इस तेज गिरावट से किसानों और व्यापारियों को प्रति क्विंटल लगभग 3,000 रुपये का सीधा घाटा उठाना पड़ रहा है.
डॉलर चना व्यापारी एवं तिलहन व्यवसाय संघ के सचिव हजारीलाल मालवीय ने बताया कि केवल उज्जैन जिले में ही लगभग 25 बड़े व्यापारियों का 30,000 क्विंटल डॉलर चना कोल्ड स्टोरेज और गोदामों में डंप पड़ा हुआ है.
सप्लाई चेन रुकने और नए ऑर्डर न मिलने से व्यापारी नए सौदे करने से बच रहे हैं. हालांकि, आर्थिक तंगी और कर्ज के दबाव के कारण कई किसान मजबूरी में अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं.
डॉलर चना सामान्य देसी चने की तरह घरेलू खपत वाली फसल नहीं है, बल्कि इसकी 80% से अधिक खपत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होती है. इसकी सबसे ज्यादा मांग खाड़ी देशों (Gulf Countries), यूरोप और अमेरिका में रहती है.
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है. जहाजों का भाड़ा (Freight Rates) बढ़ने, शिपिंग कंटेनरों की भारी किल्लत होने और विदेशी बायर्स द्वारा ऑर्डर रद्द या होल्ड करने के कारण माल भारतीय बंदरगाहों तक ही सीमित रह गया है.
डॉलर चने के वर्तमान बाजार परिदृश्य और किस्मों का ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| विवरण / मापदंड | गत वर्ष के आंकड़े | वर्तमान स्थिति (2026) |
| बड़ा डॉलर चना भाव | ₹12,000 – ₹13,000 / क्विंटल | ₹9,000 – ₹9,500 / क्विंटल |
| छोटा काबुली चना भाव | ₹6,000 / क्विंटल | < ₹5,000 / क्विंटल |
| उज्जैन में फंसा स्टॉक | सामान्य निर्बाध निर्यात | ~30,000 क्विंटल (₹करोड़ों मूल्य) |
| मुख्य निर्यातक क्षेत्र | खाड़ी देश, मध्य पूर्व व यूरोप | युद्ध के कारण शिपमेंट पूरी तरह बाधित |
मध्य प्रदेश पूरे देश में डॉलर चना उत्पादन का मुख्य केंद्र माना जाता है, जिसमें मालवा और निमाड़ अंचल की काली मिट्टी और ठंडी जलवायु इसके बड़े दाने के लिए सबसे अनुकूल है.
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मुख्य उत्पादक जिले: मालवा क्षेत्र के उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर मालवा, रतलाम, मंदसौर, नीमच, धार, राजगढ़ तथा निमाड़ क्षेत्र के खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर और बड़वानी.
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प्रमुख लोकप्रिय किस्में (Varieties):
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JGK-1: बड़ा दाना और वैश्विक मांग के लिए सबसे लोकप्रिय.
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HK-94-134: निर्यात गुणवत्ता के लिए बेस्ट मानी जाने वाली किस्म.
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KAK-2: अच्छी उपज और आकर्षक बड़े दाने वाली वैरायटी.
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PKV KABULI-2: चमकदार सफेद और आकर्षक दिखने वाला दाना.
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PHULE G-95311 (विराट): सबसे अधिक पैदावार देने वाली प्रमुख किस्म.
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उज्जैन के अनाज और तिलहन व्यापारियों का मानना है कि जैसे ही इस साल नई फसल मंडियों में आना शुरू हुई थी, उसी समय खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ गया.
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