साहूकारी, अकाल राहत और काउचिंग एक्ट हुए खत्म; जानिए MP में क्यों रद्द हुए अंग्रेजों के 7 कानून
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने 90 साल पुराने अंग्रेजों के जमाने के 7 अप्रासंगिक कानूनों को खत्म कर दिया है। विधानसभा में 'मध्य प्रदेश निरसन विधेयक 2026' पारित हुआ। जानिए कौन-कौन से कानून रद्द हुए और क्यों।
भोपाल। समय और समाज की बदलती आवश्यकताओं के साथ पुराने एवं अप्रासंगिक हो चुके कानूनों को समाप्त करना प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. इसी कड़ी में मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने प्रदेश में पिछले 80 से 90 वर्षों से चले आ रहे ब्रिटिशकालीन 7 कानूनों को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है.
ये कानून ब्रिटिश शासन के दौरान बनाए गए थे और दशकों से प्रदेश की कानूनी किताबों में दर्ज थे, हालांकि व्यावहारिक रूप से इनकी उपयोगिता सालों पहले ही खत्म हो चुकी थी. विधानसभा में 'मध्य प्रदेश निरसन विधेयक 2026' पारित होने के साथ ही इन 7 पुराने कानूनों का अस्तित्व समाप्त हो गया है.
ब्रिटिश हुकूमत के दौरान किसानों और कर्जदारों के लिए बनाए गए कई कानून आज की आधुनिक बैंकिंग प्रणाली के दौर में पूरी तरह बेअसर हो चुके थे. राज्य सरकार ने ऐसे 4 प्रमुख ऋण कानूनों को निरस्त किया है:
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डेट कन्सीलिएशन एक्ट (सेंट्रल प्रोविन्स एंड बरार रीजन) 1933: अंग्रेजों के जमाने में साहूकारों व किसानों के बीच कर्ज विवाद सुलझाने के लिए बोर्ड बनाने हेतु 1933 में यह कानून लाया गया था. अब जीरो फीसदी ब्याज पर सरकारी कर्ज व्यवस्था उपलब्ध होने से यह अप्रासंगिक हो गया था.
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प्रोटेक्शन ऑफ डेटर्स एक्ट 1937: साहूकारों द्वारा कर्जदारों को डराने-धमकाने पर रोक लगाने के लिए 1937 में बने इस कानून को भी निरस्त कर दिया गया है.
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रिलीफ ऑफ इनडेटेडनेस एक्ट 1939: किसानों को ऋण मुक्त कराने और अलग अदालतों के गठन के प्रावधान वाले 87 साल पुराने इस एक्ट को भी खत्म कर दिया गया है.
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फेमाइन रिलीफ फंड एक्ट (अकाल राहत कोष अधिनियम) 1937: प्राकृतिक आपदाओं के लिए अंग्रेजों द्वारा बनाया गया यह फंड कानून भी वर्तमान राज्य आपदा प्रबंधन प्रणालियों के कारण निष्प्रभावी हो चुका था.
ऋण संबंधी कानूनों के अलावा मोहन सरकार ने शिक्षा, चिकित्सा और राजस्व विभाग से जुड़े 3 अन्य दशकों पुराने कानूनों को भी निरस्त किया है:
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विद्या मंदिर एक्ट 1940: ब्रिटिश काल में विद्या मंदिरों की स्थापना और संचालन के लिए बने इस 86 साल पुराने कानून की उपयोगिता समाप्त हो चुकी थी.
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द मध्य प्रदेश रेग्युलेशन ऑफ काउचिंग एक्ट 1944: यह कानून अप्रशिक्षित डॉक्टरों द्वारा मोतियाबिंद का इलाज करने पर रोक लगाने के लिए बनाया गया था. वर्तमान में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम (NMC Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) में इसके पुख्ता प्रावधान होने से इस 82 साल पुराने कानून को खत्म कर दिया गया.
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लैंड सर्वे एक्ट 1947: सरकारी अधिकारियों को भूमि सर्वे के लिए निजी संपत्तियों में प्रवेश का अधिकार देने वाले इस 79 साल पुराने कानून को भी अब समाप्त कर दिया गया है.
समाप्त किए गए कानूनों और उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का संक्षिप्त विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| निरस्त किए गए कानून का नाम | निर्माण वर्ष | कानून का मूल उद्देश्य / पृष्ठभूमि |
| डेट कन्सीलिएशन एक्ट | 1933 | साहूकार और किसान के बीच कर्ज समझौते के लिए बोर्ड का गठन |
| प्रोटेक्शन ऑफ डेटर्स एक्ट | 1937 | साहूकारों द्वारा देनदारों को प्रताड़ित करने पर रोक |
| अकाल राहत कोष अधिनियम | 1937 | प्राकृतिक आपदा और अकाल के समय राहत कोष प्रबंधन |
| रिलीफ ऑफ इनडेटेडनेस एक्ट | 1939 | कर्जमुक्ति और विशेष ऋण अदालतों का गठन |
| विद्या मंदिर एक्ट | 1940 | तत्कालीन विद्या मंदिर स्कूलों का संचालन नियम |
| द एमपी रेग्युलेशन ऑफ काउचिंग एक्ट | 1944 | मोतियाबिंद का इलाज करने वाले अयोग्य डॉक्टरों पर रोक |
| लैंड सर्वे एक्ट | 1947 | भूमि सर्वेक्षण के लिए निजी भूमि पर प्रवेश का अधिकार |
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