बरसात शुरू होते ही पन्ना में बढ़ी उथली हीरा खदानें; छतरपुर से किस्मत आजमाने पहुंचे किसान, जानें पूरा गणित
पन्ना की रत्नगर्भा धरती पर ₹200 का चालान जमा कर लोग आजमा रहे हैं अपनी किस्मत। बरसात के मौसम में उथली हीरा खदानों में बढ़ी हलचल। पढ़ें यह खास रिपोर्ट।
पन्ना। मध्य प्रदेश में हीरे उगलने वाली पन्ना की रत्नगर्भा धरती की चमक अब पड़ोसी जिलों के लोगों को भी अपनी ओर तेजी से आकर्षित कर रही है। रातों-रात किस्मत बदलने और करोड़पति बनने का सपना संजोए लोग अब पन्ना पहुंच रहे हैं। यहां की अनोखी व्यवस्था के तहत कोई भी व्यक्ति सरकारी हीरा कार्यालय में मात्र ₹200 का चालान (राजस्व शुल्क) जमा कर उथली खदान का वैध पट्टा प्राप्त कर सकता है, जिसके बाद शुरू होता है मिट्टी से नायाब हीरा तलाशने का संघर्ष।
🚜 खेती छोड़ हीरे की खदान में पसीना बहा रहे किसान
पन्ना से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत कृष्णा कल्याणपुर की पट्टी हीरा खदान क्षेत्र में इन दिनों भारी हलचल है। छतरपुर जिले के सटई अंतर्गत ग्राम हीरापुर के रहने वाले दिनेश शिवहरे ने भी खेती-किसानी छोड़कर यहां का रुख किया है। दिनेश ने बताया कि उन्होंने मीडिया में पन्ना के कई लोगों को करोड़ों के हीरे मिलने की खबरें देखी थीं, जिससे प्रेरित होकर वे अपनी किस्मत आजमाने पन्ना आए हैं। वे यहीं अस्थाई डेरा डालकर कड़ी मेहनत कर रहे हैं ताकि उनकी किस्मत चमक सके।
🗓️ दिसंबर 2026 तक वैध रहेगा खदान खोदने का पट्टा
छतरपुर से आए दिनेश शिवहरे ने पन्ना के हीरा कार्यालय से 22 मई को अपना पट्टा बनवाया है, जिसकी वैधता 31 दिसंबर 2026 तक निर्धारित है। हीरा कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा खदान क्षेत्र में उन्हें <$8 \times 8$> मीटर (लंबाई और चौड़ाई) का एक निश्चित दायरा चिन्हित करके दिया गया है। दिनेश इसी सीमा के भीतर अपनी उथली खदान खोदने और हीरा तलाशने के लिए कानूनी रूप से पात्र हैं।
🌧️ बरसात के मौसम में क्यों बढ़ जाती है हीरों की खुदाई?
पन्ना में मानसून और बरसात के दौरान उथली हीरा खदानों की संख्या में अचानक बड़ी बढ़ोतरी हो जाती है। इसके मुख्य वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण निम्नलिखित हैं:
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मिट्टी का नरम होना: बारिश के पानी से सूखी और कठोर मिट्टी बेहद नरम हो जाती है, जिससे खुदाई करना काफी आसान हो जाता है।
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मिट्टी की धुलाई में आसानी: हीरों की तलाश के लिए खोदी गई मिट्टी और कंकड़-पत्थरों को धोना और छानना पड़ता है। बरसात का पानी खदानों के पास आसानी से उपलब्ध होने के कारण यह प्रक्रिया बेहद सुगम हो जाती है।
⚖️ हीरा मिलने पर क्या है सरकारी नियम?
यदि किसी पट्टाधारक को खुदाई के दौरान हीरा मिलता है, तो उसे पूरी पारदर्शिता के साथ स्थानीय सरकारी हीरा कार्यालय में जमा कराना अनिवार्य होता है। इसके बाद शासन द्वारा उस हीरे का मूल्यांकन कर उसकी खुली नीलामी आयोजित की जाती है। नीलामी से प्राप्त राशि में से सरकार अपना तय टैक्स (रॉयल्टी) काटकर शेष बची पूरी बड़ी रकम हीरा खोजने वाले व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर कर देती है, जिससे लोग सचमुच करोड़पति बन जाते हैं।
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