करीब 1800 करोड़ की लागत से बन रहा देश का सबसे लंबा रेल ग्रेड सेपरेटर, नवंबर तक पूरा होगा निर्माण
कटनी में देश के सबसे लंबे 33.40 किमी रेल ग्रेड सेपरेटर का निर्माण तेजी से जारी है। इस परियोजना के पूरा होने से ट्रेनों का संचालन सुचारू होगा और कटनी यार्ड का दबाव घटेगा।
जबलपुर। पश्चिम मध्य रेल के अंतर्गत कटनी में निर्माणाधीन देश के सबसे लंबे रेल ग्रेड सेपरेटर (रेल फ्लाईओवर) को वर्ष 2026 के अंत तक पूरी तरह परिचालन के लिए तैयार करने की दिशा में कार्य बहुत तेजी से चल रहा है। प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत विकसित की जा रही 33.40 किलोमीटर लंबी इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का एक बड़ा हिस्सा अब पूरा हो चुका है। भारतीय रेलवे ने आगामी नवंबर महीने तक इसके शेष सभी निर्माण कार्यों को पूरा करने का कड़ा लक्ष्य तय किया है, ताकि इस वर्ष के अंत तक पूरे ग्रेड सेपरेटर पर ट्रेनों का सुचारू संचालन शुरू किया जा सके।
🚆 33.40 किलोमीटर लंबी परियोजना में अप ट्रैक पहले से ही है चालू
करीब 1800 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से कटंगी खुर्द से लेकर न्यू मझगवां तक विकसित की जा रही इस विशाल परियोजना में 15.85 किलोमीटर लंबा 'अप ट्रैक' पहले ही सफलतापूर्वक चालू किया जा चुका है।
इस अप ट्रैक पर वर्तमान समय में प्रतिदिन 20 से अधिक मालगाड़ियों का निर्बाध संचालन हो रहा है। वहीं दूसरी ओर, 17.52 किलोमीटर लंबे 'डाउन ट्रैक' का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में पहुँच चुका है। पूरी तरह से वायडक्ट (पुल) आधारित यह डाउन ट्रैक भारतीय रेलवे की अब तक की सबसे लंबी एलिवेटेड रेल संरचनाओं में शुमार होगा।
🛤️ कटनी यार्ड पर घटेगा ट्रैफिक दबाव, ट्रेनों को मिलेगी सीधी राह
इस महत्वपूर्ण परियोजना के पूरी तरह से शुरू होने के बाद बिलासपुर और सिंगरौली की दिशा से आने वाली तेज रफ्तार यात्री ट्रेनें तथा मालगाड़ी ट्रेनें कटनी जंक्शन, न्यू कटनी जंक्शन और कटनी मुड़वारा यार्ड के अंदर प्रवेश किए बिना सीधे बाईपास की तरह बीना-दमोह-सागर रेलखंड की तरफ रवाना हो सकेंगी।
इससे कटनी के सबसे व्यस्त रेलवे यार्ड पर पड़ने वाला भारी ट्रैफिक दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। इसके साथ ही, यात्री ट्रेनों का संचालन और अधिक समयबद्ध व सुचारू होने के साथ-साथ मालगाड़ियों की कुल संख्या और उनकी गति में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाएगी।
⚙️ तकनीकी चुनौतियों के कारण प्रभावित हुआ डाउन ट्रैक का निर्माण
रेलवे से प्राप्त जानकारी के अनुसार, डाउन ट्रैक का निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन कुछ तकनीकी चुनौतियों और निर्माण संबंधी जटिलताओं के चलते यह कार्य निर्धारित समय सीमा से थोड़ा पीछे चल रहा है। इस पूरी परियोजना की डेडलाइन (समय-सीमा) पूर्व में दो से तीन बार बढ़ाई जा चुकी है।
कटनी मुड़वारा यार्ड के ऊपर वायडक्ट के निर्माण के दौरान गर्डर लांचिंग समेत कई अन्य महत्वपूर्ण सिविल इंजीनियरिंग कार्य अभी पूरे किए जाने बाकी हैं। पश्चिम मध्य रेल के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि निर्माण करने वाली एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल बैठाकर शेष बचे सभी कार्यों को अब युद्ध स्तर पर तेज गति से पूरा कराया जा रहा है। रेलवे का मुख्य लक्ष्य नवंबर तक निर्माण खत्म कर इस वर्ष के अंत तक ट्रैक को ट्रेनों के आवागमन के लिए पूरी तरह तैयार करना है।
📈 अप लाइन के संचालन से पहले ही मिलने लगे हैं सकारात्मक परिणाम
इस विशाल परियोजना की 15.85 किलोमीटर लंबी अप लाइन का निर्माण पिछले वर्ष ही पूरा कर लिया गया था। हालांकि, कोरोना काल के दौरान निर्माण कार्य बुरी तरह प्रभावित होने के कारण यह ट्रैक भी अपने तय समय पर तैयार नहीं हो सका था।
बहरहाल, इसके शुरू होने के बाद से मालगाड़ियों का आवागमन और संचालन कहीं अधिक व्यवस्थित हुआ है तथा ट्रेनों का होल्डिंग टाइम (रुकने का समय) काफी कम हुआ है। चूँकि कटनी में कुल पाँच अलग-अलग दिशाओं से ट्रेनों की आवाजाही होती है, इसलिए पहले यार्ड और आउटर पर ट्रेनों को लंबे समय तक रोकना पड़ता था। अब डाउन लाइन के भी पूरी तरह चालू हो जाने के बाद मालगाड़ियां बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सकेंगी, जिससे यात्री ट्रेनों के लिए भी ट्रैक की उपलब्धता बढ़ेगी और उनके संचालन में गति तथा समयबद्धता दोनों में सुधार होगा।
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