वार्डन के ट्रांसफर के खिलाफ कलेक्ट्रेट में बैठीं आदिवासी छात्राएं, जमकर की नारेबाजी

बुरहानपुर के बहादरपुर आदिवासी बालिका छात्रावास की छात्राओं ने वार्डन के ट्रांसफर के विरोध में कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया और स्थाई महिला अधीक्षिका की नियुक्ति की मांग की।

Aug 05, 2026 - 11:29
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वार्डन के ट्रांसफर के खिलाफ कलेक्ट्रेट में बैठीं आदिवासी छात्राएं, जमकर की नारेबाजी

बुरहानपुर: जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बहादरपुर गांव के शासकीय आदिवासी बालिका छात्रावास से एक बेहद भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ हॉस्टल वार्डन के अचानक हुए ट्रांसफर के विरोध में गुस्साए छात्राओं ने मंगलवार को सीधे जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर जमकर धरना-प्रदर्शन किया। इन मासूम बच्चियों ने कलेक्टर हर्ष सिंह के नाम एक ज्ञापन सौंपकर छात्रावास में जल्द से जल्द एक स्थाई महिला वार्डन की नियुक्ति किए जाने की पुरजोर मांग की है।

✊ वॉर्डन के ट्रांसफर के खिलाफ छात्राओं का कलेक्ट्रेट में हंगामा और नारेबाजी

आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित यह आदिवासी बालिका छात्रावास मुख्य बहादरपुर गांव से काफी दूर और एकांत में स्थित है।

इस हॉस्टल में शिक्षिका सीमा बिरला करोड़ा अधीक्षिका (वॉर्डन) के रूप में अपनी पूरी निष्ठा से सेवाएं दे रही थीं, लेकिन इसी बीच अचानक उनका स्थानांतरण खंडवा जिले के लिए कर दिया गया। इस फैसले से नाराज होकर छात्रावास की छात्राएं अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सीधे कलेक्ट्रेट कार्यालय जा पहुँचीं। कलेक्ट्रेट परिसर के फर्श पर बैठकर बच्चों ने वॉर्डन के ट्रांसफर के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपना रोष प्रकट किया।

🤝 अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुँचकर स्थाई वार्डन नियुक्त करने का आश्वासन

छात्राओं का यह हंगामा और प्रदर्शन देखकर आदिम जाति विभाग के सहायक आयुक्त भारत झांझपुरे तुरंत मौके पर पहुँचे और बच्चों की सभी समस्याओं को गंभीरता से सुना।

उन्होंने छात्राओं को उचित आश्वासन देकर शांत कराया। इसके बाद छात्राओं ने कलेक्टर हर्ष सिंह के नाम संबोधित ज्ञापन अधिकारियों को सौंपा, जिसमें छात्रावास में जल्द से जल्द एक स्थाई महिला अधीक्षिका की नियुक्ति की मांग की गई। जिम्मेदार अधिकारियों ने छात्राओं को भरोसा दिलाया है कि उनकी सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए बहुत जल्द स्थाई वॉर्डन की व्यवस्था कर दी जाएगी।

🌙 एकांत में स्थित होने के कारण असामाजिक तत्वों और जंगली जानवरों का सताता है डर

प्रदर्शन कर रही छात्राओं का कहना है कि, बहादरपुर गांव का यह आदिवासी बालिका छात्रावास मुख्य आबादी से काफी दूर और एकांत स्थान पर बना हुआ है।

इस कारण यहाँ रात के समय अक्सर असामाजिक तत्वों और आसपास के जंगली जानवरों का भारी डर सताता रहता है। ऐसे में यहाँ हॉस्टल में हर वक्त एक स्थाई महिला वॉर्डन का होना बेहद जरूरी है। पिछले लंबे समय से सीमा बिरला करोड़ा ही इस अधीक्षिका वॉर्डन के रूप में हॉस्टल का पूरा प्रभार संभाल रही थीं, लेकिन अचानक हुए उनके स्थानांतरण के बाद उन्होंने छात्रावास आना-जाना बंद कर दिया है। वर्तमान में कोई भी स्थाई महिला अधीक्षिका न होने के कारण इन बालिकाओं को दिन-प्रतिदिन कई तरह की गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

👩‍👧‍👧 सीमा करोड़ा को दोबारा इसी छात्रावास में नियुक्त किए जाने की पुरजोर मांग

इस अचानक हुए घटनाक्रम से छात्राओं की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। उनका कहना है कि चूंकि यह पूरी तरह से एक बालिका छात्रावास है, इसलिए यहाँ एक महिला अधिकारी का होना अत्यंत आवश्यक है ताकि वे अपनी किसी भी प्रकार की निजी या शैक्षणिक समस्या को बिना किसी संकोच या झिझक के खुलकर साझा कर सकें।

वर्तमान हालात यह बन गए हैं कि स्थाई महिला अधीक्षिका के न रहने से पूरे छात्रावास की प्रशासनिक व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं और बालिकाओं की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। छात्राओं ने प्रशासन से मांग की है कि इस समस्या का जल्द से जल्द स्थायी समाधान किया जाए, और वार्डन के रूप में दोबारा सीमा करोड़ा को ही इसी हॉस्टल में नियुक्त किया जाए ताकि वे सुरक्षित महसूस कर सकें।

🗣️ "अधीक्षिका के अभाव में छात्रावास की व्यवस्थाएं हो रही हैं प्रभावित"—छात्राएं

छात्रा अक्षरा ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि, "सीमा करोड़ा जी अधीक्षिका के रूप में यहाँ पदस्थ थीं। हमारा यह छात्रावास गांव की मुख्य बस्ती से बाहर और काफी सुनसान जगह पर है, जहाँ रात के समय हम बालिकाओं को भारी डर लगता है। अधीक्षिका सीमा करोड़ा के यहाँ होने से हम सभी बालिकाएं पूरी तरह सुरक्षित महसूस करती थीं, लेकिन उनके अचानक हुए ट्रांसफर से हमारी मुश्किलें बहुत बढ़ गई हैं। अब हालात यह हैं कि वॉर्डन के अभाव में छात्रावास में कई तरह की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। हमारी केवल यही एक मांग है कि सीमा करोड़ा को दोबारा यहीं नियुक्त किया जाए, ताकि सभी छात्राएं सुरक्षित रह सकें।"

वहीं, इस पूरे मामले पर आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त भारत झांझपुरे ने मीडिया को बताया कि, "छात्राओं की सभी बातों को सुनने के बाद हमने उनका ज्ञापन स्वीकार कर लिया है। इस मामले की गंभीरता और बालिकाओं की सुरक्षा को पूरी प्राथमिकता देते हुए बहुत जल्द ही छात्रावास में एक योग्य महिला अधीक्षिका की स्थाई व्यवस्था कर दी जाएगी, ताकि छात्राओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।"

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