एक रेडियोलॉजिस्ट के भरोसे रतलाम मेडिकल कॉलेज; करोड़ों की सीटी स्कैन मशीन भी पड़ी है ठप

रतलाम मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट और टेक्नीशियन की कमी के कारण सोनोग्राफी और सीटी स्कैन के लिए मरीजों को 1 से 2 महीने का इंतजार करना पड़ रहा है।

Sep 20, 2026 - 20:54
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एक रेडियोलॉजिस्ट के भरोसे रतलाम मेडिकल कॉलेज; करोड़ों की सीटी स्कैन मशीन भी पड़ी है ठप

रतलाम। आमतौर पर अदालतों में मुकदमों की सुनवाई के लिए 'तारीख पर तारीख' मिलने की बात सुनी जाती है, लेकिन रतलाम के शासकीय मेडिकल कॉलेज में सोनोग्राफी और सीटी स्कैन जैसी अनिवार्य जांचों के लिए मरीजों को लंबी तारीखें दी जा रही हैं।

यहां वेटिंग लिस्ट इतनी लंबी हो चुकी है कि आम मरीजों को अपनी जांच कराने के लिए 1 से 2 महीने तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, करीब 2 महीने पहले स्थापित की गई करोड़ों रुपये की सीटी स्कैन मशीन को संचालित करने के लिए भी योग्य टेक्नीशियन नहीं मिल पा रहे हैं। कई बार विज्ञापन जारी करने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट नहीं मिलने से अस्पताल आने वाले मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक आर्थिक प्रभाव निम्न आय वर्ग के गरीब मरीजों पर पड़ रहा है।

🩺 केवल एक डॉक्टर के भरोसे चल रहा पूरा रेडियोलॉजी विभाग: सीनियर रेजिडेंट्स ने भी छोड़ी नौकरी

रतलाम शासकीय मेडिकल कॉलेज के ओपीडी (OPD) में हर दिन सैकड़ों की संख्या में मरीज पहुंचते हैं, लेकिन प्रबंधन को रेडियोलॉजिस्ट ढूंढे नहीं मिल रहे हैं।

दर्जनों बार रेडियोलॉजिस्ट के रिक्त पदों के लिए विज्ञापन जारी किए गए, लेकिन डॉक्टरों की कमी पूरी नहीं हो सकी। बीच में जिन सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की नियुक्ति की गई थी, वे भी नौकरी छोड़कर चले गए। वर्तमान समय में रतलाम मेडिकल कॉलेज का पूरा रेडियोलॉजी विभाग केवल एक स्थाई सीनियर रेडियोलॉजिस्ट (असिस्टेंट प्रोफेसर) के भरोसे ही संचालित हो रहा है।

🚑 पड़ोसी जिलों और राजस्थान से भी आते हैं मरीज: इमरजेंसी और गर्भवती महिलाओं को दी जा रही प्राथमिकता

रतलाम मेडिकल कॉलेज पर न केवल रतलाम जिले का, बल्कि आसपास के झाबुआ, अलीराजपुर, मंदसौर, धार और पड़ोसी राज्य राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के मरीजों का भी भारी दबाव रहता है।

अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रदीप मिश्रा ने बताया, "यहाँ आने वाले मरीजों की भारी संख्या के अनुपात में कम से कम 3 से 4 रेडियोलॉजिस्ट की सख्त आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल एक परमानेंट असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत हैं। इसी वजह से सोनोग्राफी के लिए लंबी वेटिंग लिस्ट बन रही है। हालांकि, आपातकालीन (इमरजेंसी) मरीजों और गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत जांच सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। बाकी मरीजों को आगे की तारीखें दी जाती हैं। वहीं, सीटी स्कैन मशीन का ट्रायल पूर्ण हो चुका है और टेक्नीशियनों की ट्रेनिंग प्रक्रिया जारी है।"

📜 बॉन्ड की अवधि पूरी होते ही नौकरी छोड़ देते हैं डॉक्टर: वॉक-इन-इंटरव्यू की प्रक्रिया जारी

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, रेडियोलॉजिस्ट की कमी की समस्या संस्थान की शुरुआत से ही बनी हुई है।

अधीक्षक डॉ. प्रदीप मिश्रा ने बताया, "अस्पताल की सबसे बड़ी चुनौती योग्य रेडियोलॉजिस्ट का न मिलना है। सीनियर रेजिडेंट रेडियोलॉजिस्ट बहुत मुश्किल से मिलते हैं। कई डॉक्टर केवल 1 साल का अनिवार्य सरकारी बॉन्ड पूरा करने आते हैं और अवधि खत्म होते ही इस्तीफा देकर चले जाते हैं। फिलहाल भी मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट के पदों के लिए वॉक-इन-इंटरव्यू की प्रक्रिया खुली रखी गई है।"

💰 प्राइवेट सेक्टर में ज्यादा सैलरी बनना मुख्य कारण: नए डॉक्टरों के जॉइन करने से उम्मीद

सरकारी और प्राइवेट सेक्टर में मिलने वाले वेतन का भारी अंतर भी इस समस्या की मुख्य वजह है।

डॉ. प्रदीप मिश्रा ने स्पष्ट किया कि रतलाम मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजिडेंट के पद पर लगभग 60 से 75 हजार रुपये प्रति माह वेतन मिलता है, जबकि प्राइवेट अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में उन्हें इससे कहीं अधिक आकर्षक पैकेज दिया जाता है। इसी कारण डॉक्टर सरकारी सेवा में टिक नहीं पाते। हालांकि, हाल ही में हुए वॉक-इन-इंटरव्यू में कुछ डॉक्टरों को शॉर्टलिस्ट किया गया है, जिनके जल्द जॉइन करने के बाद इस गंभीर समस्या से राहत मिलने की पूरी संभावना है।

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