छिंदवाड़ा में शिक्षकों के अटैचमेंट पर फूटा आदिवासियों का गुस्सा, गांव के स्कूल छोड़ शहर में पढ़ा रहे मास्टर

छिंदवाड़ा के ग्रामीण स्कूलों से अटैचमेंट करवाकर शहर में पढ़ाने वाले शिक्षकों के खिलाफ आदिवासियों ने शिकायत की है। जनजाति विभाग ने मामले की जांच के लिए टीम गठित की है।

Aug 05, 2026 - 12:40
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छिंदवाड़ा में शिक्षकों के अटैचमेंट पर फूटा आदिवासियों का गुस्सा, गांव के स्कूल छोड़ शहर में पढ़ा रहे मास्टर

छिन्दवाड़ा : सरकारी नौकरी पाने के लिए अक्सर लोग किसी भी क्षेत्र और दूरदराज के इलाकों में नौकरी करने के लिए तैयार हो जाते हैं, लेकिन नौकरी पक्की होने के बाद वही लोग ग्रामीण इलाकों को छोड़कर शहरी या मनपसंद जगहों पर ट्रांसफर और अटैचमेंट करवाने के लिए जुगाड़बाजी में जुट जाते हैं। हालांकि, अपनी राजनीतिक या प्रशासनिक पहुंच के दम पर शहरों के नजदीक के स्कूलों में अटैचमेंट लेने वाले ऐसे लापरवाह शिक्षकों पर अब प्रशासन का सख्त डंडा चलने वाला है। दरअसल, आदिवासी और दुर्गम ग्रामीण इलाकों की बदहाल शिक्षा व्यवस्था के चलते स्थानीय ग्रामीणों ने अब इन शिक्षकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और अटैचमेंट की आड़ में मौज काट रहे शिक्षकों की लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

🏫 गांव के स्कूल में है पक्की पोस्टिंग, लेकिन शहर के स्कूलों में पढ़ा रहे हैं शिक्षक

बीते मंगलवार को छिंदवाड़ा जिला मुख्यालय से लगभग 150 किलोमीटर दूर, नरसिंहपुर जिले की सीमा से लगे एक दूरस्थ गांव चिलक से तमाम आदिवासी ग्रामीण लंबी-चौड़ी शिकायतों की फेहरिस्त लेकर सीधे जनजाति कार्य विभाग जा पहुँचे।

ग्रामीणों ने जनजाति कार्य विभाग के डिप्टी कमिश्नर नरोत्तम बरकड़े से मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनके गांव चिलक के सरकारी स्कूल में केवल एक ही स्थायी शिक्षक की पदस्थापना है, लेकिन वे भी स्कूल नहीं आते। वर्तमान में पूरा स्कूल सिर्फ कुछ अतिथि शिक्षकों के भरोसे ही संचालित किया जा रहा है। गांव के बच्चों के अभिभावकों का आरोप है कि जो स्थायी (परमानेंट) शिक्षक हैं, उन्होंने अपनी पहुंच और जुगाड़ के बल पर अपना अटैचमेंट शहर के नजदीक या सीधे शहरी स्कूलों में करवा लिया है, जिसकी वजह से उनके बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो चुकी है।

👥 परमानेंट टीचरों का अटैचमेंट रद्द कर उन्हें मूल स्कूल वापस भेजने की मांग

शिकायत पत्र में आगे यह भी आरोप लगाया गया है कि स्कूल में जो तीन अतिथि शिक्षक नियुक्त किए गए हैं, उनका व्यवहार भी बच्चों के साथ ठीक नहीं रहता है और न ही वे ठीक से पढ़ा पाते हैं, जिससे उनके बच्चों का भविष्य अंधकार की तरफ जा रहा है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि स्थायी शिक्षकों का अवैध अटैचमेंट तुरंत प्रभाव से खत्म किया जाए और उन्हें उनके मूल पदस्थापना वाले स्कूल में वापस भेजा जाए, ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई दोबारा सुचारू रूप से शुरू हो सके। गांव से आए एक स्कूली छात्र के पिता जियालाल मेनिया ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि, "हमारे गांव के स्कूल में एक अतिथि शिक्षक की नियुक्ति वर्ष 2023 में की गई थी, लेकिन वह कभी स्कूल पढ़ाने के लिए गई ही नहीं, इसके बावजूद लगातार उनकी उपस्थिति दर्ज होती रही और हर महीने तनख्वाह भी निकलती रही। इस पूरे मामले की भी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।"

🔍 संभाग स्तर पर जांच टीम नियुक्त, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जनजातीय कार्य विभाग के डिप्टी कमिश्नर नरोत्तम बरकड़े ने मीडिया को बताया कि, "चिलक सहित जिले के कई अन्य स्कूलों के मामले भी हमारे संज्ञान में आए हैं, जहाँ स्थायी शिक्षक की नियुक्ति होने के बावजूद उन्होंने सांठगांठ कर वहाँ से अपना अटैचमेंट दूसरी जगह करवा लिया है।"

उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे तमाम मामलों की जांच के लिए संभाग स्तर पर एक विशेष जांच टीम का गठन कर दिया गया है, जो जल्द ही मौके पर पहुंचकर स्कूलों का औचक निरीक्षण करेगी और नियमों के विरुद्ध कार्य करने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, जनजातीय कार्य विभाग आयुक्त द्वारा पूर्व में अक्टूबर 2024 में एक स्पष्ट निर्देश पत्र जारी किया गया था, जिसमें सभी प्रकार के अवैध अटैचमेंट को तत्काल समाप्त कर शिक्षकों को उनके मूल स्कूलों में वापस भेजने के निर्देश दिए गए थे। उसी आदेश के अनुपालन में अब अटैचमेंट को पूरी तरह खत्म किया जाएगा।

⚖️ जुगाड़बाजी, ट्रांसफर और अटैचमेंट का गंदा खेल

गौरतलब है कि कागजों पर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में शिक्षकों की विधिवत नियुक्ति तो कर दी जाती है, लेकिन रसूख और जुगाड़ के बल पर कई शिक्षक कागजी हेराफेरी कर शहरी इलाकों के स्कूलों में अपना अटैचमेंट करवा लेते हैं।

इन शिक्षकों का मूल वेतन तो उनके मुख्य (मूल) ग्रामीण स्कूल से ही निकाला जाता है, लेकिन वे कागजों और व्यवहारिक रूप से किसी अन्य जगह मलाईदार पदों पर काम करते नजर आते हैं। ऐसे में उन दूरदराज के सरकारी स्कूलों के मासूम बच्चों का भविष्य पूरी तरह अंधकार में डूब जाता है, जहाँ उनकी वास्तविक पोस्टिंग होती है, क्योंकि शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण बच्चों की पढ़ाई पर इसका सबसे बुरा असर पड़ता है।

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