त्योहारों पर किन्नर नेग विवाद पर कपड़ा व्यापारियों का बड़ा फैसला, रक्षाबंधन पर प्रति दुकान ₹200 राशि तय
इंदौर में कपड़ा व्यापारियों ने त्योहारों पर किन्नर समुदाय की नेग की बढ़ती मांग से परेशान होकर दान राशि फिक्स कर दी है। रक्षाबंधन पर प्रति दुकान ₹200 दिए जाएंगे।
इंदौर: त्योहारों के मौसम में किन्नर समुदाय द्वारा नेग और बधाई की रकम की लगातार बढ़ती मांग से परेशान होकर इंदौर के कपड़ा व्यापारियों ने एक बहुत बड़ा और अहम फैसला लिया है। कपड़ा व्यापारियों ने अब सभी प्रमुख त्योहारों के लिए नेग अथवा दान की राशि को पूरी तरह फिक्स कर दिया है। लिहाजा, आगामी रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर क्लॉथ मार्केट एसोसिएशन के निर्णयों के अनुसार किन्नरों को प्रत्येक दुकान से केवल ₹200 ही दिए जाएंगे।
🛍️ किन्नरों द्वारा जबरन वसूली को लेकर क्लॉथ मार्केट एसोसिएशन का बड़ा फैसला
मिली जानकारी के अनुसार, रक्षाबंधन पर हर साल शहर के रिहायशी इलाकों के अलावा तमाम प्रमुख बाजारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों से किन्नर समुदाय द्वारा जबरिया वसूली के रूप में नेग व दान राशि ₹1000 से लेकर ढाई हजार रुपए तक मांगी जाती है।
इस भारी-भरकम मांग के कारण हर साल बाजारों में दुकानदारों और किन्नरों के बीच तनाव व विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इन तमाम हालातों को देखते हुए पिछले साल ही नंदलालपुरा के दोनों किन्नर समूहों और इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के बीच एक आपसी सहमति बनाई गई थी।
🤝 रक्षाबंधन पर 200 रुपए प्रति दुकान देने का तय हुआ नियम
पूर्व में बनी इस सहमति के अनुसार यह तय किया गया था कि रक्षाबंधन और होली के पावन पर्व पर प्रति दुकान ₹200 तथा दीपावली के अवसर पर ₹500 नेग राशि दी जाएगी।
इस साल एक बार फिर से किन्नरों की तरफ से अधिक राशि की मांग किए जाने के बाद संगठन ने उन्हें पिछले साल की सहमति की याद दिलाई है। साथ ही, सभी व्यापारियों से यह आग्रह किया गया है कि वे नंदलालपुरा के दोनों किन्नर समूह के लोगों को आगामी रक्षाबंधन पर केवल ₹200 प्रति दुकान ही नेग के रूप में प्रदान करें।
🕊️ निर्धारित नेग दान करें, बाजार में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखें
इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन (IRGA) के अक्षय जैन ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि, "आगामी रक्षाबंधन, होली और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों के मद्देनजर एसोसिएशन ने शहर के सभी व्यापारी बंधुओं से अपील की है कि किन्नर समुदाय के साथ पूर्व में हुए आपसी समन्वय और सम्मान का ख्याल रखते हुए केवल निर्धारित नेग राशि ही प्रदान करें, जिससे बाजार में पूरी तरह सौहार्दपूर्ण और शांतिपूर्ण वातावरण बना रहे।"
उन्होंने यह भी बताया कि एसोसिएशन ने सभी व्यापारियों से आपसी सम्मान, सहयोग और भाईचारे की भावना बनाए रखने का अनुरोध किया है।
👑 किन्नर गुरु मंगला का बयान: "विवाद जैसी कोई स्थिति नहीं है"
इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए किन्नर गुरु मंगला गौरी नंद गिरी ने कहा कि, "शुरुआत से ही क्लॉथ मार्केट से हमारे द्वारा इतनी ही दान राशि ली जा रही है। वहाँ किसी भी प्रकार के विवाद या अत्यधिक मांग जैसी कोई स्थिति नहीं है।"
उन्होंने सभी पक्षों से अपील की कि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचते हुए त्योहारों को पूरी तरह सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने माना कि पूर्व में बने आपसी समन्वय का पालन करना सभी पक्षों के हित में है, जिससे बाजार में शांति और सकारात्मक माहौल हमेशा कायम रहेगा।
💰 लगातार बढ़ रही है दान राशि की मांग और बढ़ते विवाद
इंदौर जैसे बड़े महानगर में, जहाँ हजारों व्यापारिक प्रतिष्ठान और घने रिहायशी इलाके हैं, नंदलालपुरा के किन्नर समुदाय के दो समूहों द्वारा अपने अलग-अलग क्षेत्र आपस में बांटकर दान राशि या नेग लिया जाता है।
यह कुल राशि सालाना करोड़ों रुपए बैठती है। इसके बावजूद हर त्योहार और अन्य विभिन्न अवसरों पर प्रति घर और दुकानों से न्यूनतम ₹500 से लेकर ₹2100 तक की मांग की जाती है।
इसके अलावा घरों में बच्चों के जन्म या शादी-विवाह जैसे मांगलिक अवसरों पर यह मनचाही मांग बढ़कर ₹50,000 से ₹51,000 तक पहुँच जाती है। ऐसी स्थिति में कई सामान्य परिवार इतनी बड़ी रकम चुकाने में असमर्थ होते हैं, जिसके चलते अक्सर किन्नर समूहों द्वारा अप्रिय स्थितियाँ निर्मित की जाती हैं। कई बार हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि मारपीट, गाली-गलौज और हमलों तक की नौबत आ जाती है।
हाल ही में इंदौर के तुलसी नगर इलाके में ₹51,000 की मांग पूरी न होने पर किन्नरों द्वारा जबरन एक घर में घुसकर अश्लील हरकतें करने का मामला सामने आया था, जहाँ एक महिला को बाल पकड़कर नीचे गिरा दिया गया था और उसके नवजात बच्चे को लेकर भी गंभीर धमकियाँ दी गई थीं। हालांकि, इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच समझौता करा दिया था।
⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला: "किन्नर समुदाय को जबरन नेग मांगने का कानूनी अधिकार नहीं"
देश भर में इस तरह की जबरन वसूली और मामलों से परेशान आम नागरिकों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 28 जून 2026 को एक बहुत ही ऐतिहासिक और स्पष्ट फैसला सुनाया है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि "किन्नर समुदाय के पास मांगलिक अवसरों पर जबरन 'नेग' या 'बधाई' वसूलने का कोई भी कानूनी अधिकार नहीं है।"
माननीय न्यायालय ने इसे भारतीय न्याय संहिता (BNS) के अंतर्गत एक स्पष्ट आपराधिक कृत्य करार दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि नेग के नाम पर किसी भी प्रकार की जबरदस्ती की जाती है या डराया-धमकाया जाता है, तो उसे गंभीर अपराध माना जाएगा।
अदालत ने किन्नर पक्ष की ओर से दाखिल की गई रेखा देवी की याचिका को खारिज करते हुए दो टूक कहा कि किसी भी प्रकार की वसूली केवल स्थापित कानून के दायरे में ही की जा सकती है। इसके साथ ही कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत उन्हें समाज में भेदभाव और शोषण से पूरी सुरक्षा पाने का अधिकार प्राप्त है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वे कानून को अपने हाथ में लें।
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