सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भोपाल के व्यापारियों में चिंता, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से लगाई राहत की गुहार
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोपाल के रिहायशी इलाकों में दुकानों पर सीलिंग का खतरा मंडरा रहा है। व्यापारियों ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से मिलकर राहत की मांग की है।
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के रिहायशी इलाकों में संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब शहर के व्यापारियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। इसी सिलसिले में गुरुवार को विभिन्न व्यापारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से मुलाकात कर उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया और तत्काल राहत देने की मांग की। व्यापारियों का साफ तौर पर कहना है कि यदि नगर निगम ने बड़े पैमाने पर सीलिंग अभियान शुरू कर दिया, तो इससे भोपाल की लगभग 90 प्रतिशत दुकानें सीधे तौर पर प्रभावित होंगी और आने वाले बड़े त्योहारी सीजन से ठीक पहले शहर का पूरा कारोबार पूरी तरह से ठप हो सकता है।
🏛️ सुप्रीम कोर्ट में सरकार द्वारा पक्ष मजबूती से न रखे जाने पर चिंता
व्यापारी संघ के प्रतिनिधि आनंद जैन ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से भोपाल शहर की वास्तविक और व्यावहारिक स्थिति को प्रभावी ढंग से नहीं रखा जा सका। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजधानी भोपाल में वर्ष 2005 के बाद से आज तक कोई नया मास्टर प्लान लागू नहीं किया गया है, जबकि इसी समयावधि के दौरान शहर की कुल आबादी में कई गुना वृद्धि हो चुकी है। इसके मुकाबले पर्याप्त संख्या में व्यावसायिक भूखंड (कमर्शियल प्लॉट्स) भी विकसित नहीं किए गए, जिसकी वजह से मजबूरन लोगों को अपनी आजीविका चलाने के लिए रिहायशी क्षेत्रों में ही व्यापारिक प्रतिष्ठान शुरू करने पड़े।
🔄 'मिक्स लैंड यूज' नीति लागू करने या शुल्क लेकर नियमित करने की मांग
बैठक के दौरान व्यापारियों ने सरकार के सामने पुरजोर मांग रखी है कि गत 29 जून को तैयार किए गए मसौदे को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, जिस पर पहले ही 15 जुलाई तक आम जनता और हितधारकों से दावे-आपत्तियां भी ली जा चुकी हैं।
यदि यह तुरंत संभव नहीं हो पाता है, तो शहर में 'मिक्स लैंड यूज' (मिश्रित भूमि उपयोग) की व्यवस्था को लागू किया जाए अथवा गुजरात राज्य के वर्ष 2022 वाले मॉडल की तर्ज पर एक निश्चित शुल्क लेकर ऐसे सभी प्रतिष्ठानों को कानूनी रूप से नियमित कर दिया जाए। व्यापारियों का तर्क है कि इस कदम से हजारों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों का रोजगार बचाया जा सकेगा।
📉 राखी और दीपावली जैसे बड़े त्योहारों से पहले व्यापार पर बड़ा संकट
आनंद जैन ने आगे बताया कि नगर निगम की तरफ से जमीनी स्तर पर कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है, जबकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से राहत के रूप में तीन सप्ताह का समय दिया गया था।
उनके अनुसार यदि यह सीलिंग अभियान और अधिक तेज हुआ, तो शहर के लगभग 30 हजार से 50 हजार छोटे-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान इसकी चपेट में आ सकते हैं। इसका सीधा असर आगामी रक्षाबंधन, दीपावली और अन्य प्रमुख त्योहारों के व्यापार पर पड़ेगा, जिससे न केवल व्यापारियों को भारी नुकसान होगा बल्कि आम नागरिकों को भी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं आसानी से उपलब्ध होने में गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
🤝 मंत्री का आश्वासन: "व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए निकाला जाएगा उचित समाधान"
इस उच्चस्तरीय बैठक में मौजूद व्यापारियों और कानूनी जानकारों/अधिवक्ताओं के बीच कई महत्वपूर्ण कानूनी विकल्पों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कुछ प्रतिनिधियों ने माननीय मुख्य न्यायाधीश के समक्ष नई याचिका दायर करने और इस बीच नगर निगम की चल रही कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने की मांग भी उठाई।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह मामला कानूनी रूप से काफी जटिल है और वर्तमान में सरकार विधि विशेषज्ञों (कानूनी सलाहकारों) के साथ चर्चा करके इसका व्यावहारिक समाधान तलाश रही है।
उन्होंने व्यापारियों को पूरा भरोसा दिलाते हुए कहा कि, "व्यापारियों और आम जनता के हितों की रक्षा के लिए जो भी सर्वोत्तम वैधानिक रास्ता होगा, सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ेगी। हमारे विभाग द्वारा मास्टर प्लान दो साल पहले ही तैयार कर लिया गया है, जिसे माननीय मुख्यमंत्री जी देखेंगे और जैसे ही अनुकूल समय होगा, उसे आधिकारिक तौर पर जारी किया जाएगा।"
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