त्योहारी सीजन में महंगी होगी मिठाई, चीनी के दामों में 15% तक का जबरदस्त उछाल
त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में 8 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। उत्पादन घटने और मांग बढ़ने से आम आदमी की जेब पर महंगाई की मार पड़ने वाली है।
आने वाले त्योहारी सीजन में आम आदमी की जेब पर महंगाई की तगड़ी मार पड़ने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें लगातार ऊपर की ओर जा रही हैं। पिछले एक महीने के आंकड़ों पर गौर करें तो चीनी के दाम औसतन 8 फीसदी तक बढ़ चुके हैं, जबकि देश के कुछ राज्यों में यह उछाल 15 फीसदी तक पहुँच गया है। ऐसे में यह आशंका गहराई जा रही है कि इस बार दिवाली और दशहरे जैसे बड़े त्योहारों पर मिठाइयों का स्वाद जनता के लिए काफी महंगा साबित हो सकता है।
🍬 त्योहारी सीजन की मिठास पर महंगाई का पहरा
त्योहारी सीजन के दौरान देश में चीनी की खपत हमेशा अपने चरम पर होती है, लेकिन ठीक इसी नाजुक समय पर कीमतों में आया यह भारी उछाल आम आदमी का घरेलू बजट बिगाड़ने वाला है। इन बढ़ती कीमतों पर लगाम कसने के लिए अब चीनी मिलों ने एक अहम कदम उठाया है।
होलसेल मार्केट में पिछले एक महीने के भीतर चीनी के दाम 400 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ चुके हैं। इन बिगड़ते हालातों को देखते हुए चीनी मिलों ने इस साल अपनी ‘शुगर क्रशिंग’ (गन्ना पेराई) की प्रक्रिया तय समय से 10 से 15 दिन पहले ही शुरू करने का बड़ा फैसला लिया है, ताकि बाजार में नई चीनी की आपूर्ति जल्द से जल्द बढ़ाई जा सके।
📉 क्यों आसमान छू रहे हैं चीनी के दाम?
चीनी की कीमतों में इस अचानक आई तेजी के पीछे उत्पादन में आई भारी कमी सबसे मुख्य वजह है। शुरुआती अनुमान यह लगाया जा रहा था कि इस साल देश में कुल 293 लाख टन चीनी का उत्पादन होगा, लेकिन असल आंकड़ा घटकर केवल 280 लाख टन पर ही सिमट गया। यह तय अनुमान से लगभग 5 फीसदी कम है।
हालांकि, राहत की बात केवल इतनी है कि पिछले साल का लगभग 50 लाख टन का पुराना स्टॉक अभी भी उपलब्ध है। लेकिन चुनौती यह है कि देश में चीनी की कुल सालाना खपत ही 280 लाख टन के करीब है, और इस साल 8 लाख टन चीनी का निर्यात भी किया जा चुका है। इसके अलावा, एल नीनो के प्रभाव तथा अगले साल भी उत्पादन घटने की आशंका ने बाजार में घबराहट का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे कीमतों को और अधिक हवा मिल रही है।
🏙️ देश के महानगरों में क्या हैं चीनी के नए खुदरा रेट?
सरकारी आंकड़ों पर अगर नजर डाली जाए, तो देश के लगभग हर बड़े शहर में चीनी की खुदरा कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। राजधानी दिल्ली में जो चीनी एक महीने पहले 45 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, वह अब बढ़कर 49 रुपये पर पहुँच गई है। पश्चिम बंगाल में इसका असर सबसे ज्यादा देखने को मिला है, जहाँ 49 रुपये वाली चीनी अब सीधे 55 रुपये प्रति किलो बिक रही है।
इसी प्रकार चेन्नई में दाम 46 रुपये से बढ़कर 53 रुपये, मुंबई में 46 रुपये से 52 रुपये तथा झारखंड की राजधानी रांची में 47 रुपये से बढ़कर 51 रुपये प्रति किलो हो गए हैं।
📈 आम आदमी परेशान, लेकिन चीनी मिलों की बल्ले-बल्ले
चीनी के ये बढ़ते दाम जहाँ एक तरफ आम उपभोक्ताओं का बजट बिगाड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चीनी बनाने वाली कंपनियों के लिए यह मुनाफे का बड़ा सौदा साबित हो रहा है। इस तेजी के कारण बलरामपुर चीनी, द्वारिकेश शुगर, श्री रेणुका शुगर और डालमिया भारत शुगर जैसी प्रमुख कंपनियों के मार्जिन में अच्छा सुधार देखने को मिल सकता है।
हालांकि, यह स्थिति सरकार के महत्वाकांक्षी इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की योजना) के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है। यदि चीनी के दाम ऊंचे बने रहे, तो मिलें गन्ने के रस से इथेनॉल बनाने के बजाय सीधे चीनी बनाकर बेचना ज्यादा मुनाफे का सौदा मानेंगी, जिससे देश में इथेनॉल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। सरकार ने फिलहाल स्टॉक लिमिट तय करके और मिलों के स्टॉक की औचक जांच कर कीमतों को काबू में करने की कोशिश जरूर की है, लेकिन खुदरा बाजार में इसका वास्तविक असर दिखना अभी बाकी है।
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