15 अगस्त नहीं, तिथि के अनुसार इस प्राचीन मंदिर में मनाई जाती है आजादी; जानिए क्या है वजह
उज्जैन के बड़ा गणेश मंदिर में आजादी का पर्व अंग्रेजी तारीखों के बजाय हिंदू पंचांग की तिथि के अनुसार मनाया जाता है। इस वर्ष यह पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा।
उज्जैन: पूरे देश भर में आजादी का महापर्व हर साल 15 अगस्त को मनाया जाता है। लेकिन महाकाल की इस पावन नगरी में एक ऐसा ऐतिहासिक मंदिर मौजूद है, जिसकी स्थापना ही एक बड़े राष्ट्र, एक बड़े गणतंत्र और स्वदेशी तंत्र के संकल्प के साथ की गई थी। हम बात कर रहे हैं उज्जैन के अति प्राचीन 'बड़ा गणेश मंदिर' की, जो कि विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के गेट नंबर 5 के ठीक सामने स्थित है।
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ आजादी का पर्व अंग्रेजी तारीख के अनुसार नहीं, बल्कि भारतीय पंचांग की 'तिथि' के अनुसार मनाया जाता है। इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प और बड़ा ऐतिहासिक कारण है—एक ऐसी तिथि जो हर साल अंग्रेजी कैलेंडर में अलग-अलग तारीखों पर आती है। इस वर्ष 2026 में यह विशेष तिथि 11 अगस्त को पड़ रही है, इसलिए बड़ा गणेश मंदिर में आजादी का पर्व 11 अगस्त को ही मनाया जाएगा।
📜 आजादी की तारीख और काल गणना को लेकर हुआ था बड़ा ऐतिहासिक निर्णय
उज्जैन का यह बड़ा गणेश मंदिर लगभग 125 वर्ष पुराना है। यहाँ के 90 वर्षीय वरिष्ठ पंडित एवं विख्यात ज्योतिषाचार्य आनंद शंकर व्यास ने जानकारी देते हुए बताया कि, "यह मंदिर ज्योतिर्लिंग दक्षिणमुखी श्री महाकालेश्वर और शक्तिपीठ हरसिद्धि माता मंदिर के ठीक बीच, बड़े एवं छोटे रुद्र सागर तालाब के पास स्थित है। इस मंदिर की स्थापना भारत को स्वतंत्रता मिलने से बहुत पहले मेरे दादाजी नारायण व्यास ने की थी।"
पंडित आनंद शंकर व्यास ने बताया कि उनके दादा नारायण व्यास एक विश्व-विख्यात ज्योतिषाचार्य थे। उनके समय में राष्ट्रसंत बाल गंगाधर तिलक ने महाराष्ट्र के पुणे में एक विशाल ज्योतिष अधिवेशन का आयोजन किया था, जिसमें रियासत की ओर से दादा नारायण व्यास भी शामिल हुए थे। जब वे वहाँ पहुँचे, तो बाल गंगाधर तिलक ने उनसे कहा था कि आप तो काल-गणना के केंद्र यानी महाकाल की नगरी उज्जैन से पधारे हैं, इसलिए देश की आजादी की तिथि का निर्णय निश्चित रूप से आपके माध्यम से ही होगा। यह कोई आम निर्णय नहीं था, बल्कि भारत के स्वतंत्र होने की तिथि को पंचांग के अनुसार तय करने की एक बड़ी योजना थी।
📅 मंदिर पक्ष का प्राचीन पंचांग और प्रमाण के साथ बड़ा दावा
पंडित आनंद शंकर व्यास ने आगे बताया कि जब ज्योतिष अधिवेशन में बाल गंगाधर तिलक ने उनके दादा से पूछा, तब उन्होंने ज्योतिषीय गणना करके एक निश्चित तिथि बताई थी। उन्होंने कहा था कि जब भी भारत की स्वतंत्रता की घोषणा हो, तो "श्रावण महीने की कृष्ण पक्ष की चौदस (चतुर्दशी)" की तिथि सबसे शुभ रहेगी।
ठीक ऐसा ही हुआ; जब आजाद भारत का वह ऐतिहासिक समय आया, तो हिंदू पंचांग के अनुसार विक्रम संवत 2005 और श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि थी, जिसे अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार वर्ष 1947 और 15 अगस्त का दिन कहा जाता है। इसी तिथि के अनुसार भारत की आजादी की विधिवत घोषणा हुई थी।
🪔 जिस तरह राखी और दिवाली मनाते हैं तिथि पर, वैसे ही मनाते हैं आजादी
मंदिर के पुजारी और ज्योतिषाचार्य आनंद शंकर व्यास का कहना है कि, "आज भी हमारे देश में हर एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व तिथि के अनुसार ही मनाए जाते हैं। जैसे रक्षाबंधन, होली और दीपावली कभी भी एक फिक्स अंग्रेजी तारीख पर नहीं आते, ठीक उसी प्रकार हम अपने राष्ट्रीय पर्वों को भी पंचांग की तिथि के अनुसार ही मनाते हैं।"
इस वर्ष आजादी का पर्व 15 अगस्त (तिथि के अनुसार) हम 11 अगस्त को मनाएंगे और इसी प्रकार 26 जनवरी का राष्ट्रीय पर्व भी तिथि के अनुसार ही मनाया जाता है। ऐसा हर साल यहाँ किया जाता है ताकि हमारी प्राचीन सनातन परंपराओं का निर्वहन हो सके और उन महान क्रांतिकारियों, स्वतंत्रता सेनानियों तथा विद्वानों की वैचारिक विरासत का सम्मान हमेशा बना रहे। आज के समय में हमारे ये राष्ट्रीय पर्व केवल अंग्रेजी तारीखों के पन्नों में सिमटकर रह गए हैं, जिसे बदलने की जरूरत है।
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