पन्ना से 15 गुना ज्यादा हीरे उगलेगा छतरपुर, मुंबई में निवेशकों को लुभाएगी एमपी सरकार
छतरपुर के बक्सवाहा में पन्ना से 15 गुना ज्यादा हीरों का भंडार मौजूद है। 13 अगस्त को मुंबई में होने वाली माइनिंग मीट के जरिए सरकार निवेशकों को आमंत्रित कर रही है।
भोपाल: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले को उसकी बेशकीमती हीरों की खदानों के लिए पूरी दुनिया में पहचाना जाता है, लेकिन अब से लगभग 22 साल पहले छतरपुर जिले के बक्सवाहा में खोजी गई देश की विशाल हीरा खदान जल्द ही जमीन से हीरे उगलना शुरू कर सकती है। इस खदान में अनुमान के मुताबिक करीब 3 मिलियन कैरेट से अधिक हीरों का भारी भंडार मौजूद है, जिसके खनन (माइनिंग) कार्य के लिए राज्य सरकार अब देश-विदेश के बड़े निवेशकों को ढूंढने जा रही है। इसी सिलसिले में आगामी 13 अगस्त को राज्य सरकार की ओर से मुंबई में एक विशेष 'डायमंड माइनिंग कनेक्ट मीट' आयोजित की जा रही है, जिसमें हीरा खनन क्षेत्र से जुड़े दिग्गज कारोबारियों के साथ निवेश को लेकर अहम चर्चा की जाएगी।
⏳ करीब 25 साल पहले शुरू हुआ था छतरपुर के बक्सवाहा में सर्वे
छतरपुर के बक्सवाहा क्षेत्र में देश के सबसे बड़े हीरा भंडार होने का अनुमान लगाया गया है। माना जा रहा है कि बक्सवाहा की इन खदानों में लगभग 3.42 करोड़ कैरेट के हीरे दबे हुए हैं। हालांकि, पर्यावरण से जुड़े गंभीर और संवेदनशील मुद्दों के कारण यहां खनन का काम पिछले कई सालों से कानूनी पेचीदगियों में अटका हुआ है।
दरअसल, इन हीरों के खनन के लिए शुरुआती दौर में लगभग 382 हेक्टेयर वन भूमि की मांग की गई थी। इस जमीन पर वन विभाग द्वारा यह अनुमान लगाया गया था कि वहां करीब ढाई लाख पेड़ मौजूद हैं। बक्सवाहा में हीरों की खोज का मुख्य काम साल 2000 से 2005 के बीच ऑस्ट्रेलिया की प्रसिद्ध कंपनी 'रियो टिंटो' (Rio Tinto) द्वारा किया गया था।
💎 पन्ना से भी 15 गुना ज्यादा हीरों का है बड़ा भंडार
बक्सवाहा में हुई खोज के दौरान कई स्थानों पर 'किंबरलाइट' (Kimberlite) की चट्टानें पाई गई थीं, जिनकी जांच के बाद वहां हीरों की भारी मौजूदगी की पुष्टि हुई थी। ऐसा माना जाता है कि बक्सवाहा में हीरों का यह भंडार पन्ना की खदानों से भी लगभग 15 गुना ज्यादा बड़ा है।
पन्ना में कुल 22 लाख कैरेट हीरे हैं, जिसमें से अब तक 13 लाख कैरेट हीरों का खनन किया जा चुका है। हालांकि, पर्यावरण संबंधी कड़क अनुमतियों और अन्य कानूनी अड़चनों के चलते रियो टिंटो और आदित्य बिड़ला समूह की 'एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्री लिमिटेड' जैसी बड़ी कंपनियां इस प्रोजेक्ट से पीछे हट चुकी हैं।
🤝 सरकार कर रही है नियमों का सरलीकरण, 10 साल बाद खनन की उम्मीद
तकरीबन 10 साल के लंबे अंतराल के बाद मध्य प्रदेश सरकार बक्सवाहा के इस बंद पड़े डायमंड प्लांट में एक बार फिर से खनन कार्य शुरू कराने के लिए निवेशकों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है। आगामी 13 अगस्त को मुंबई में होने जा रही इस 'डायमंड माइनिंग कनेक्ट मीट' में रियो टिंटो, एस्सेल माइनिंग, डी बियर्स (De Beers), वेदांता और एनएमडीसी (NMDC) सहित कई अन्य राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है।
राज्य सरकार द्वारा खनन से जुड़ी अनुमतियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को काफी हद तक सरल बनाया जा रहा है, ताकि निवेशकों की राह आसान हो सके। सरकार को पूरी उम्मीद है कि इस हीरा खदान की नीलामी से सरकारी खजाने को भारी राजस्व प्राप्त होगा।
🌳 खदान के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच बड़ी चुनौती
हालांकि, इस हीरा परियोजना के साथ पर्यावरण से जुड़ा एक बहुत बड़ा और गंभीर मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। हीरा खनन की इस प्रक्रिया से लगभग 382 हेक्टेयर वन भूमि सीधे तौर पर प्रभावित होगी।
इसके चलते वहां बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ों को काटना पड़ेगा, जिसकी वजह से उस क्षेत्र में रहने वाले वन्य-जीवों और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। पर्यावरण प्रेमियों और सरकार के बीच इस संतुलन को साधना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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