Sheopur News: जनसुनवाई में अधिकारियों पर झूठा आरोप लगाना पड़ा भारी; व्यापारी जगदीश अग्रवाल के खिलाफ होगी FIR
श्योपुर में जनसुनवाई के दौरान तहसीलदार और पटवारी पर रिश्वत मांगने का झूठा आरोप लगाने वाले व्यापारी के खिलाफ जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है। जाँच में आरोप गलत पाए गए, अब व्यापारी पर FIR दर्ज होगी।
श्योपुर: जनसुनवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों पर झूठे आरोप लगाना और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करना श्योपुर के एक व्यापारी को भारी पड़ गया है। बीते मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में कनक दंडवत होकर नामांतरण नहीं होने की झूठी शिकायत करने और आत्महत्या की धमकी देने वाले व्यापारी जगदीश अग्रवाल के खिलाफ अब जिला प्रशासन ने एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी है। कलेक्टर शीला दाहिमा के निर्देश पर जनसुनवाई प्रभारी एवं डिप्टी कलेक्टर संजय जैन द्वारा कराई गई विस्तृत जाँच में सभी आरोप पूरी तरह झूठे और निराधार पाए गए हैं।
जाँच में हुआ चौंकाने वाला खुलासा: नामांतरण के लिए कभी कोई आवेदन ही नहीं किया था व्यापारी ने
डिप्टी कलेक्टर संजय जैन की जाँच रिपोर्ट में सामने आया कि संबंधित भूमि के नामांतरण के लिए व्यापारी जगदीश अग्रवाल ने न तो तहसीलदार न्यायालय में कभी कोई आवेदन प्रस्तुत किया था और न ही कोई मामला विचाराधीन था। पूछताछ के दौरान व्यापारी ने स्वयं स्वीकार किया कि उसने जल्दबाजी और सुनी-सुनाई बातों के आधार पर शिकायत में रिश्वत के झूठे आरोप लिख दिए थे। किसी भी अधिकारी या पटवारी द्वारा उससे किसी प्रकार की राशि की मांग नहीं की गई थी।
प्रशासन की छवि धूमिल करने का आरोप: जनसुनवाई की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करने पर अब होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई
जिला प्रशासन का कहना है कि व्यापारी ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर बयान देकर न केवल आम जनता को भ्रमित किया, बल्कि शासकीय कार्यप्रणाली और प्रशासन की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया। कलेक्टर शीला दाहिमा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कोतवाली थाना प्रभारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर व्यापारी के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
जनसुनवाई प्रभारी संजय जैन बोले—धमकी देना और झूठा आरोप लगाना गंभीर अपराध
जनसुनवाई प्रभारी डिप्टी कलेक्टर संजय जैन ने बताया, ''आवेदक ने सन् 2009 में रजिस्ट्री कराई थी, जिसे उसने गिरवी रखा हुआ था। उसने कोई आवेदन नहीं लगाया था। रिश्वत के आरोप पर उसका कहना था कि उसने केवल सुनकर शिकायत कर दी। जब उससे आत्महत्या की धमकी देने के बारे में पूछा गया तो उसने कहा कि वह तनाव में था। कलेक्टर के समक्ष धमकी देना और खुद को आत्महत्या के लिए प्रेरित करना तथा शासन की छवि धूमिल करना गंभीर अपराध है। सिस्टम को प्रभावित करने और जनता को भ्रमित करने के कारण व्यापारी के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।''
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