किसानों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार, कम पानी वाली फसलों को प्रोत्साहित करने के आदेश

मध्य प्रदेश में इस मानसून 15 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कम बारिश और संभावित सूखे से निपटने के लिए अधिकारियों को पुख्ता निर्देश दिए हैं।

Aug 11, 2026 - 13:01
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किसानों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार, कम पानी वाली फसलों को प्रोत्साहित करने के आदेश

मध्य प्रदेश में इस मानसून सत्र के दौरान औसत से कम बारिश दर्ज किए जाने के बाद राज्य सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें कम वर्षा की वर्तमान स्थिति और उससे उत्पन्न होने वाली संभावित परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के जिन जिलों में कम बारिश हुई है या सूखे जैसे हालात बन रहे हैं, वहाँ किसानों और आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी संबंधित विभाग अभी से पुख्ता तैयारियां सुनिश्चित करें।

📊 1 जून से 10 अगस्त तक 15 प्रतिशत कम बारिश, धान की 84% बोवनी पूरी

बैठक के दौरान अधिकारियों ने जानकारी दी कि 1 जून से 10 अगस्त की समयावधि के दौरान प्रदेश में सामान्य वर्षा (571 मिमी) की तुलना में औसतन 483 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज की गई है, जो कि सामान्य से लगभग 15 प्रतिशत कम है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 513 मिलीमीटर और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 459 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इसके बावजूद, राज्य में धान की कुल 84 प्रतिशत बोवनी का कार्य पूरा हो चुका है।

🌾 किसानों को कम पानी वाली फसलों के लिए किया जाए प्रेरित

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आने वाले रबी सीजन के लिए किसानों को अभी से प्रेरित किया जाए ताकि वे कम पानी में उगने वाली फसलों को प्राथमिकता दे सकें। विशेष रूप से चने की फसल के लिए किसानों को पर्याप्त मात्रा में उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराए जाएं। इसके अलावा, राज्य में खाद और बीज की उपलब्धता हर समय बनी रहनी चाहिए और कृषि विभाग को लगातार किसान संगठनों के साथ संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

📋 मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए अन्य प्रमुख निर्देश और दिशा-सख्तियां

बैठक में राज्य के हालातों को देखते हुए कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाने के आदेश दिए गए हैं:

  • राज्य और जिला स्तर पर आपदा नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) पूरी तरह सक्रिय रहने चाहिए।

  • जलभराव या बाढ़ संभावित क्षेत्रों से नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने की पुख्ता योजना और राहत शिविरों का प्रबंध हो।

  • संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तैयारी रखे।

  • वर्षा या जलभराव से प्रभावित फसलों का राजस्व विभाग के दलों द्वारा पूरी पारदर्शिता के साथ सर्वेक्षण किया जाए और किसानों को आपदा राहत कोष से मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया तेज हो।

  • मूंग खरीदी में गुणवत्ता या अनियमितता की शिकायत मिलने पर तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए।

  • उर्वरक और बीजों की कालाबाजारी की शिकायतों पर तत्काल कदम उठाए जाएं।

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ा जाए।

  • किसानों को सिंचाई के लिए निर्बाध और पर्याप्त बिजली मिले।

  • वर्षाकाल के उपरांत सड़कों की त्वरित मरम्मत कराई जाए।

  • बांधों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में निचले इलाकों में समय रहते चेतावनी जारी की जाए।

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