एआई के दौर में बदलती शिक्षा और बच्चों का भविष्य, नईदुनिया संवाद कार्यक्रम में विशेषज्ञों की खास चर्चा
एआई के दौर में बच्चों की शिक्षा और करियर को लेकर नईदुनिया संवाद में विशेषज्ञों ने चर्चा की। जानिए कैसे एआई के सीमित इस्तेमाल से बच्चे स्किल डेवलप कर सकते हैं।
आज के डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बच्चों और युवाओं की पढ़ाई का एक अहम हिस्सा बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे रोकना न तो संभव है और न ही उचित है, बल्कि जरूरत इस बात की है कि बच्चों को एआई का सही, संतुलित और जिम्मेदारी के साथ उपयोग करना सिखाया जाए। एआई जहाँ एक ओर बच्चों को कठिन विषयों को सरल भाषा में समझाने, नई जानकारियां देने और सीखने में मदद करने का काम कर रहा है, वहीं इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि बच्चे हर काम के लिए तैयार-कराए जवाबों को सीधे कॉपी-पेस्ट करने लगें।
⚠️ एआई पर अत्यधिक निर्भरता कम कर सकती है सोचने और रिसर्च करने की क्षमता
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एआई पर जरूरत से ज्यादा निर्भर रहना बच्चों की मौलिक सोच, सवाल करने की क्षमता, रिसर्च करने और समस्याओं का खुद समाधान खोजने के कौशल को कमजोर कर सकता है। कई बार एआई गलत या भ्रामक जानकारियां भी दे देता है, इसलिए उससे प्राप्त किसी भी जानकारी का सत्यापन (फैक्ट चेक) करना बेहद जरूरी है। बच्चों को यह समझना होगा कि एआई केवल एक सहायक (टूल) है, जो उनकी जगह सोचने का काम नहीं कर सकता। ऐसे में माता-पिता और स्कूलों की यह मुख्य जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को एआई के फायदों के साथ-साथ उसकी सीमाओं से भी अवगत कराएं।
🎨 ग्रामीण क्षेत्रों में मददगार, लेकिन घट रही है विद्यार्थियों की क्रिएटिव स्किल्स
एआई टूल्स आज ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए भी काफी मददगार साबित हो रहे हैं और 24 घंटे उपलब्ध रहकर कठिन विषयों को उनकी स्थानीय भाषा में आसान बना रहे हैं। यहाँ तक कि दृष्टिबाधित छात्र भी इसका लाभ उठा रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि रेडिमेड जानकारियां आसानी से उपलब्ध होने के कारण बच्चों की क्रिएटिविटी (रचनात्मकता) और थिंकिंग स्किल्स प्रभावित हो रही हैं। सोशल मीडिया और एआई से जुड़े वीडियोज पर आंख मूंदकर भरोसा करना छात्रों के लिए खतरनाक हो सकता है, इसलिए इसे हमेशा एक निश्चित दायरे में ही रखना चाहिए।
🎓 उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव तय, डिग्री के साथ स्किल डेवलपमेंट है जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में हम एआई का जो प्रभाव देख रहे हैं, वह कुल बदलाव का केवल दो प्रतिशत है। आने वाले समय में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जो परिवर्तन होने वाले हैं, उनकी कल्पना करना भी कठिन है। ऐसे में बच्चों में गहरी समझ, इनोवेशन, व्यवहारिकता और दूरदृष्टि होना आवश्यक है। एआई कभी भी शिक्षकों का स्थान नहीं ले सकता। आज कैंपस प्लेसमेंट का परिदृश्य भी पूरी तरह बदल चुका है, जहाँ केवल डिग्री काफी नहीं है बल्कि बच्चों को अपनी स्किल्स (कौशल) को विकसित करना होगा ताकि वे भविष्य की चुनौतियों और अवसरों का सामना कर सकें।
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