मंडला के माहिष्मती घाट पर बच्चों ने की नर्मदा सेवा, जलस्तर घटने के बाद हाथों से साफ की सीढ़ियां

मंडला के माहिष्मती घाट पर नर्मदा का जलस्तर कम होने के बाद बच्चों और युवाओं ने अपने हाथों से सीढ़ियों पर जमी कीचड़ को साफ किया। मां नर्मदा के प्रति उनकी यह निष्काम सेवा लोगों को प्रेरित कर रही है।

Aug 14, 2026 - 19:04
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मंडला के माहिष्मती घाट पर बच्चों ने की नर्मदा सेवा, जलस्तर घटने के बाद हाथों से साफ की सीढ़ियां

मध्य प्रदेश के मंडला जिले में माँ नर्मदा के प्रति अगाध आस्था और अनन्य भक्ति की एक बेहद प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। मंडला के सुप्रसिद्ध माहिष्मती घाट पर इन दिनों लगातार बारिश के चलते नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ गया था, जिसके कारण घाट की पांचों आरती चौकियां और दस से अधिक सीढ़ियां पूरी तरह जलमग्न हो गई थीं। हालांकि, जब पानी का स्तर कम हुआ और बाढ़ का पानी उतरा, तो अपने पीछे सीढ़ियों और पूरे घाट पर गाद (कीचड़) की एक मोटी परत छोड़ गया। ऐसे में घाट की भव्यता और पवित्रता को बनाए रखने के लिए कुछ बच्चों ने जो किया, उसने देखने वाले हर शख्स का दिल जीत लिया।

🙌 न हाथों में सफाई का सामान, न किसी का दबाव; बस माँ नर्मदा के आंगन को संवारने का था जज्बा

माहिष्मती घाट पर उस वक्त एक अद्भुत नजारा देखने को मिला जब चार-पांच छोटे-छोटे बच्चे बिना किसी सफाई उपकरण के अपने नन्हे हाथों से घाट की सीढ़ियों को नर्मदा जल से धो-धोकर साफ करने में जुट गए। उन्हें किसी ने ऐसा करने के लिए नहीं कहा था, और न ही उनके मन में किसी प्रकार के दिखावे की चाह थी। उनके दिल में केवल एक ही भाव था कि शाम की भव्य नर्मदा आरती से पहले उनकी माँ का घाट पूरी तरह स्वच्छ और सुंदर नजर आना चाहिए। सीढ़ी-दर-सीढ़ी गाद साफ करते हुए इन बच्चों के चेहरों पर थकान की जगह सिर्फ और सिर्फ सेवा का संतोष और आत्मिक आनंद साफ झलक रहा था।

❤️ 'आस्था उम्र की मोहताज नहीं होती': दुर्घटना टालने के लिए दोस्तों ने उठाया सफाई का बीड़ा

माँ नर्मदा की इस निष्काम सेवा में जुटे बाल भक्तों और उनके साथियों ने बताया कि भक्ति केवल पूजा-पाठ का नाम नहीं है, बल्कि माँ के आंगन को अपने हाथों से साफ रखना भी सच्ची सेवा है। सेवादार कन्हैया नंदा और हनुमत मांझी ने बताया कि बारिश के दिनों में बाढ़ के बाद सीढ़ियों पर बहुत अधिक फिसलन हो जाती है, जिससे दूर-दूर से दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के साथ दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। इसी अनहोनी को रोकने और आने वाले भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने खुद अपनी जिम्मेदारी समझकर इस सफाई का बीड़ा उठाया है। बिना किसी प्रचार या स्वार्थ के इन बच्चों द्वारा की गई यह निस्वार्थ सेवा यह साबित करती है कि सच्ची देशप्रेम और माँ के प्रति भक्ति किसी उम्र की मोहताज नहीं होती।

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