सतना में लगातार बारिश से बाढ़ जैसे हालात, उफान पर नदियां और कई इलाकों में भरा पानी

सतना में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी उफान पर है और प्रशासन ने बाढ़ जैसे हालातों से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं।

Aug 20, 2026 - 19:19
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सतना में लगातार बारिश से बाढ़ जैसे हालात, उफान पर नदियां और कई इलाकों में भरा पानी

मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर अपने उग्र रूप में है और राज्य के कई जिलों में मौसम के तेवर बेहद तल्ख बने हुए हैं। सतना जिले सहित आसपास के तमाम आंचलिक क्षेत्रों में बीते 24 घंटों से लगातार मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। हालात यह हैं कि शहरी बस्तियों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। जिला प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और एहतियात के तौर पर आम जनता से अपील की जा रही है कि वे किसी भी स्थिति में उफनते हुए नदी-नालों और रपटों को पार करने का जोखिम न उठाएं।

🌊 शहर के कई इलाकों में भरा पानी, चित्रकूट में उफनाई मंदाकिनी नदी

सतना जिले में बारिश ने ऐसा कहर बरपाया है कि शहर के प्रमुख निचले इलाकों जैसे प्रेमनगर ओवर-अंडर ब्रिज, भरहुत नगर और मुख्तियारगंज में भारी जलभराव हो गया है, जिसके चलते मुख्य मार्गों पर आवागमन पूरी तरह से ठप हो गया है। इसके अलावा, भगवान श्री राम की पावन तपोभूमि चित्रकूट में तो स्थिति और भी गंभीर हो गई है, जहाँ पवित्र मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए खतरे के निशान तक पहुंच गया है। पानी घाटों के ऊपर बहने लगा है और आसपास की कई दुकानें व मकान पानी की चपेट में आ गए हैं। परमहंस आश्रम धारकुंडी, मझगवां, जैतवारा और बिरसिंहपुर क्षेत्रों में भी पानी लोगों के घरों तक पहुंच चुका है, जिससे खरीफ की फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है।

🚨 प्रशासन पूरी तरह अलर्ट, विस्थापितों के लिए प्रमोद वन में की गई खाने-पीने की व्यवस्था

लगातार बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए सतना नदी, माधवगढ़ नदी और आसपास के तमाम नाले लाल खतरे के निशान की ओर बढ़ रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो चुका है। अपर कलेक्टर विकास सिंह ने हालात की जानकारी देते हुए बताया कि चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान पर आने से भारतघाट और मंदाकिनी घाट पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करते हुए प्रभावित और विस्थापित होने वाले लोगों के रुकने, ठहरने तथा भोजन-पानी की तमाम व्यवस्थाएं चित्रकूट के प्रमोद वन में सुनिश्चित कर दी गई हैं, ताकि पानी की वजह से हालात बिगड़ने पर किसी भी नागरिक को असुविधा का सामना न करना पड़े।

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