मनरेगा की जगह लागू 'विकसित भारत जी राम जी' योजना पर उठे सवाल, अजय बिश्नोई ने जताई आपत्ति
मध्य प्रदेश में मनरेगा की जगह शुरू हुई 'विकसित भारत जी राम जी' योजना को लेकर जबलपुर में जनप्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई है। अजय बिश्नोई ने प्रावधानों में बदलाव की मांग की है।
मध्य प्रदेश में मनरेगा के स्थान पर केंद्र की 'विकसित भारत जी राम जी' (VB-G RAM-G) योजना को लागू किया गया है, लेकिन इसके क्रियान्वयन को लेकर प्रदेश भर के जनप्रतिनिधियों में भारी असमंजस की स्थिति है। पूर्व कैबिनेट मंत्री अजय बिश्नोई ने जबलपुर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान इस योजना के प्रावधानों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि इसमें कई ऐसी शर्तें हैं जो पंच, सरपंच और आम जनप्रतिनिधियों की समझ से परे हैं। जबलपुर के मानस भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले भर के करीब 500 सरपंच, उप-सरपंच और जिला पंचायत प्रतिनिधि शामिल हुए, जहाँ उन्होंने इस योजना को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं।
🏗️ 10 चुनिंदा कार्यों की जटिलता और जमीन की कमी, क्या ये योजना पंचायतों के लिए व्यावहारिक है?
जिला पंचायत के सीईओ अभिषेक गहलोत ने प्रतिनिधियों को जानकारी दी कि इस नई योजना के तहत मध्य प्रदेश के लिए केवल 10 कार्य ही प्रस्तावित किए गए हैं। इन कार्यों में जल संरक्षण, आजीविका मिशन और सुगम सड़क निर्माण जैसी गतिविधियां शामिल हैं। हालांकि, सरपंचों का कहना है कि इनमें से अधिकांश कार्य केवल समूह की महिलाओं द्वारा किए जा सकते हैं या फिर उन कामों के लिए पंचायत के पास सरकारी जमीन ही उपलब्ध नहीं है। सबसे ज्यादा विवाद 'सुगम संपर्क सड़क' निर्माण के नियम को लेकर है, जिसके तहत सड़क केवल वहीं बन सकती है जहाँ पहले से ही एक मार्ग मौजूद हो। पूर्व मंत्री अजय बिश्नोई ने इस अजीबोगरीब प्रावधान पर तंज कसते हुए कहा कि जहाँ पहले से सड़क है, वहाँ दूसरी बनाने का क्या औचित्य? उन्होंने प्रशासन से राज्य सरकार को पत्र लिखकर इस नियम को बदलने की मांग की है।
📉 मजदूरी का संकट और रोजगार की गारंटी पर सवाल, मनरेगा मजदूरों का भविष्य क्या होगा?
योजना के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी बाधा मजदूरी भुगतान में होने वाली देरी है। सरपंचों का कहना है कि आज के दौर में 270 रुपये की मजदूरी के लिए कोई मजदूर काम करने को तैयार नहीं है, और यदि कोई कर भी ले, तो 5-6 महीने तक भुगतान न मिलना गरीब मजदूरों के लिए सबसे बड़ी समस्या है। पनागर विधानसभा के सरपंच घनश्याम सिंह धुर्वे ने स्पष्ट कहा कि मनरेगा के तहत मिलने वाले 100 दिन के रोजगार की गारंटी अब भी एक बड़ा सवाल है, क्योंकि 'विकसित भारत जी राम जी' योजना में ज्यादातर काम आजीविका से जुड़े हैं, जिनमें सामान्य मजदूर के लिए कोई जगह नहीं है। वन ग्रामों और कब्जेदार जमीन वाले क्षेत्रों में यह योजना पूरी तरह से निष्प्रभावी साबित हो रही है, जिससे मजदूरों को रोजगार देने का उद्देश्य ही धूमिल होता नजर आ रहा है।
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