मध्य प्रदेश विधानसभा में अब एमपीपीएससी (MPPSC) के जरिए होगी भर्तियां, पारदर्शिता लाने की तैयारी

मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय में नियुक्तियों को पारदर्शी बनाने के लिए अब एमपीपीएससी (MPPSC) के माध्यम से चयन कराने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।

Aug 21, 2026 - 10:37
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मध्य प्रदेश विधानसभा में अब एमपीपीएससी (MPPSC) के जरिए होगी भर्तियां, पारदर्शिता लाने की तैयारी

मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय में भविष्य की नियुक्तियों और चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी तथा प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी चल रही है। प्रशासनिक हलकों में इस बात पर गंभीर चर्चा जारी है कि अब सचिवालय में होने वाली प्रमुख भर्तियों को मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के माध्यम से कराया जाए। यदि इस प्रस्ताव पर मुहर लगती है, तो अवर सचिव, उप सचिव और अपर सचिव स्तर के महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियां सीधे पीएससी के जरिए की जाएंगी, जिससे पिछले लंबे समय से चली आ रही नियुक्तियों से जुड़ी चर्चाओं और विवादों पर विराम लग सकेगा।

📋 30 सालों के प्रमुख नियुक्ति विवाद और बैकडोर एंट्री के आरोप

विधानसभा सचिवालय की नियुक्तियों को लेकर अतीत में कई बार सवाल उठते रहे हैं। पिछले 30 वर्षों के इतिहास पर नजर डालें तो अलग-अलग कार्यकाल के दौरान बैकडोर नियुक्तियों, नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को लाभ पहुंचाने, डेप्युटेशन और बिना अनिवार्य अर्हता के पदोन्नति देने जैसे आरोप सामने आते रहे हैं।

  • 1993 - 2003 का कार्यकाल: बिना टाइपिंग परीक्षा के क्लर्क से अंडर सेक्रेटरी बनाने, नियमों के विपरीत पदोन्नति और 25 से अधिक फर्जी समायोजन के मामले सामने आए, जो जांच के बाद एफआईआर और बर्खास्तगी तक पहुंचे।

  • ईश्वरदास रोहाणी का कार्यकाल: स्टेनोग्राफर और सुरक्षा गार्डों की सीधी भर्ती में तय मानकों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे।

  • डॉ. सीतारमन शर्मा का कार्यकाल: सीधी भर्ती की प्रक्रिया भारी विवादों और कानूनी अड़चनों के कारण पूरी तरह ठप रही।

  • गिरीश गौतम का कार्यकाल: रिश्तेदारों और करीबियों को नियुक्तियां देने के आरोप लगे, जिससे जुड़ा मामला उच्च न्यायालय (High Court) तक जा पहुंचा। इसके अलावा, सचिवालय में दैनिक वेतनभोगियों को छह-छह महीने के लिए रखकर बाद में उन्हें स्थायी करने और पदोन्नति पाकर अपर सचिव स्तर तक पहुंचने के मामले भी समय-समय पर चर्चा का विषय रहे हैं।

⚖️ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का बयान, प्रशासनिक दक्षता लाना है मुख्य उद्देश्य

विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि सचिवालय की प्रशासनिक दक्षता, शुचिता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि प्रमुख पदों पर भर्तियां पूरी तरह निष्पक्ष माध्यम से हों। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पीएससी के जरिए चयन कराने पर विचार किया जा रहा है, ताकि केवल योग्य और कुशल अभ्यर्थियों को ही अवसर मिल सके। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि यह नई व्यवस्था लागू होती है, तो इससे विधानसभा की भर्ती प्रक्रिया में पूरी तरह पारदर्शिता आएगी और लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक शंकाओं का समाधान हो सकेगा।

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