टूटता रिश्ता बना खुशियों का ठिकाना, ग्वालियर हाईकोर्ट की पहल से दिव्यांग दंपती ने शुरू किया 'इशारा कैफे'

ग्वालियर हाईकोर्ट की पहल पर तलाक की कगार पर पहुंचे मूक-बधिर दंपती के लिए परिसर में 'इशारा कैफे' शुरू किया गया है, जिससे उन्हें आर्थिक मजबूती मिलेगी।

Aug 21, 2026 - 17:20
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टूटता रिश्ता बना खुशियों का ठिकाना, ग्वालियर हाईकोर्ट की पहल से दिव्यांग दंपती ने शुरू किया 'इशारा कैफे'

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच परिसर में गुरुवार को एक ऐसी मानवीय और प्रेरणादायी पहल का शुभारंभ हुआ, जिसने सकारात्मक न्याय के साथ-साथ एक जरूरतमंद परिवार के सम्मानजनक पुनर्वास और स्वावलंबन की दिशा में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। जो दंपती कभी आपसी कलह और तंगहाली के चलते एक-दूसरे से अलग होना चाहते थे, कोर्ट की सफल काउंसलिंग के बाद न सिर्फ उनका विवाद हमेशा के लिए खत्म हो गया, बल्कि अब हाईकोर्ट की विशेष पहल पर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए परिसर में ही एक कैफे की शुरुआत कराई गई है, जिसे नाम दिया गया है 'इशारा कैफे'

💔 आर्थिक तंगी और मतभेदों के कारण टूटने की कगार पर आ गया था 27 साल पुराना रिश्ता

करीब 27 साल पहले जीवनसाथी बने इस मूक-बधिर दिव्यांग दंपती के घर कुछ समय बाद दो बेटियों के जन्म से खुशियां आई थीं, लेकिन समय के साथ आर्थिक संकट गहराता गया। वे दिल्ली में एक एनजीओ की मदद से कैफे चलाकर गुजारा करते थे, लेकिन कमाई घटने और मंदी के कारण कैफे बंद हो गया, जिससे उनके जीवन में भारी आर्थिक तंगी आ गई। रुपयों की इस किल्लत का असर उनके रिश्ते पर ऐसा पड़ा कि आपसी मतभेद बढ़ते-बढ़ते तलाक तक जा पहुंचे। करीब 8 साल पहले उन्होंने रिश्ता खत्म करने की अर्जी दी, जिसके बाद फैमिली काउंसलिंग शुरू हुई। मूक-बधिर मध्यस्थों के जरिए उनकी समस्याएं समझी गईं और काउंसलिंग से उनके सारे गिले-शिकवे दूर हो गए।

🏛️ हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति ने किया उद्घाटन, वाइट बोर्ड बनेगा संवाद का जरिया

दंपती की इस गंभीर समस्या को जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति विवेक रूसिया के संज्ञान में लाया गया, तो उनके पुनर्वास के लिए ग्वालियर हाईकोर्ट परिसर में ही कैफे खोलने का निर्णय लिया गया। गुरुवार को इसका भव्य उद्घाटन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया ने किया। चूंकि दंपती बोल और सुन नहीं सकता, इसलिए कैफे में आने वाले ग्राहकों से संवाद के लिए एक सफेद (वाइट) बोर्ड रखा गया है, जिस पर ग्राहक लिखकर अपना ऑर्डर दे सकेंगे। यह अनूठी पहल समाज में एक सकारात्मक संदेश दे रही है।

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