भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की 600 पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश, जल्द आ सकता है फैसला

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 36 लोगों की मौत के मामले में जांच कमेटी ने 600 पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी है। जल्द ही कोर्ट का बड़ा फैसला आ सकता है।

Aug 21, 2026 - 17:11
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भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की 600 पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश, जल्द आ सकता है फैसला

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के बहुचर्चित भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले में गठित जांच कमेटी ने अपनी विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच को सौंप दी है। इस भीषण त्रासदी में भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के सेवन से 36 लोगों की जान चली गई थी, जिसने पूरे देश में सनसनी फैला दी थी। अब जांच कमेटी द्वारा सौंपी गई 600 पन्नों की इस रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट जल्द ही इस मामले में कड़े आदेश जारी कर सकता है।

⚰️ दिसंबर-जनवरी के दौरान हुई थीं 36 मौतें, सरकार पर उठे थे सवाल

यह पूरा मामला दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के बीच का है, जब इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की सप्लाई के कारण एक के बाद एक 36 लोगों की मौत हो गई थी। इस दिल दहला देने वाली घटना ने शहरी पेयजल व्यवस्था और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इस दौरान राज्य सरकार पर मौतों के आंकड़े छिपाने के भी गंभीर आरोप लगे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ितों को न्याय दिलाने और सच्चाई सामने लाने के लिए हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद कोर्ट ने निष्पक्ष जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस सुनील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच कमेटी का गठन किया था।

📑 600 पन्नों की रिपोर्ट में खुली लापरवाही की पोल, दोषियों पर लटकी तलवार

हाईकोर्ट द्वारा गठित इस उच्चस्तरीय जांच कमेटी ने लंबी और गहन पड़ताल के बाद भागीरथपुरा कांड के असली कारणों का खुलासा किया है। कमेटी ने अपनी जांच में यह भी खंगाला है कि इस पूरी लापरवाही के लिए कौन-कौन से अधिकारी और कर्मचारी जिम्मेदार थे। इन सभी महत्वपूर्ण तथ्यों, साक्ष्यों और प्रशासनिक कमियों को शामिल करते हुए लगभग 600 पन्नों की एक बेहद विस्तृत रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई है। अब इस रिपोर्ट के अध्ययन के बाद अदालत दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दे सकती है, जिससे पीड़ित परिवारों को लंबे इंतजार के बाद न्याय मिलने की उम्मीद बंध गई है।

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