ससुर की शिकायत पर ओलंपिक खिलाड़ी अंकित शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज, उम्र घटाकर नौकरी हासिल करने का आरोप
रियो ओलंपियन एथलीट अंकित शर्मा पर उम्र घटाकर और फर्जी दस्तावेजों के सहारे आयकर विभाग में नौकरी पाने का गंभीर आरोप लगा है। ससुर की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
मध्य प्रदेश के मुरैना जिले से खेल जगत और प्रशासन को झकझोर देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। देश के जाने-माने एथलीट और रियो ओलंपिक-2016 में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके लॉन्ग जंपर अंकित शर्मा पर फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के सहारे उम्र घटाकर सरकारी नौकरी हासिल करने का गंभीर आरोप लगा है। यह शिकायत उनके ससुर डॉ. राजकुमार तिवारी द्वारा दर्ज कराई गई है, जिसके आधार पर मुरैना सिटी कोतवाली पुलिस ने आरोपी एथलीट के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और दस्तावेजों की बारीकी से जाँच शुरू कर दी है।
🎂 ससुर का आरोप: जन्मतिथि बदलकर और फर्जी टीसी के सहारे हासिल की नौकरी
उत्तर प्रदेश के आगरा (पिनाहट) के रहने वाले एथलीट अंकित शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने अपनी वास्तविक जन्मतिथि 1 अगस्त 1987 के बजाय दस्तावेजों में 20 जुलाई 1992 दर्ज कराकर खुद को पाँच साल छोटा दिखाया। शिकायत के मुताबिक, इसी बदली हुई जन्मतिथि के सहारे उन्होंने मुरैना और अन्य जगहों के स्कूलों में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) और अंकसूचियों के जरिए पढ़ाई की। आरोप है कि इसी फर्जीवाड़े के दम पर उन्होंने कम आयु वर्ग की खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और बाद में खेल कोटे के आधार पर चेन्नई में आयकर विभाग में निरीक्षक (इंस्पेक्टर) पद की सरकारी नौकरी हासिल की। पुलिस को इस मामले में स्कूल के प्रवेश रजिस्टर, छात्र रजिस्टर और अन्य फर्जी दस्तावेज सौंपे गए हैं।
⚖️ पुलिस ने दर्ज किया मामला, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और पदकों पर भी उठे सवाल
सीएसपी दीपाली चंदौरिया ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि शुरुआती जाँच और शिकायती तथ्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब दस्तावेजों की सत्यता की पुष्टि करने के लिए लगातार दबिश दे रही है और जाँच पूरी होने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि अंकित शर्मा ने अपने करियर में 2010 राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों और 2016 दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के साथ रियो ओलंपिक में भी देश का प्रतिनिधित्व किया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन फर्जी दस्तावेजों और कम उम्र के लाभ के आधार पर उन्होंने उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार से भारी-भरकम इनामी राशि भी हासिल की है।
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