शहडोल में नई बिल्डिंग मिलने पर भी पुरानी जर्जर इमारत में बैठने को मजबूर छात्र, वीडियो वायरल

शहडोल में क्लासरूम की छतों से पानी टपकने और नई बिल्डिंग न मिलने से परेशान स्कूली छात्र कलेक्ट्रेट पहुंच गए। बच्चों ने कलेक्टर से मिलकर अपनी समस्या बताई।

Aug 21, 2026 - 17:28
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शहडोल में नई बिल्डिंग मिलने पर भी पुरानी जर्जर इमारत में बैठने को मजबूर छात्र, वीडियो वायरल

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में पिछले कुछ दिनों से लगातार झमाझम बारिश का दौर जारी है, जिससे जनजीवन के साथ-साथ स्कूली व्यवस्थाओं की भी पोल खुलती नजर आ रही है। गुरुवार रात से हो रही मूसलाधार बारिश के बीच शहडोल जिला मुख्यालय के कुछ स्कूली बच्चे सीधे जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय जा पहुंचे। बच्चों का कहना था कि वे अपनी समस्या सीधे कलेक्टर साहब को बताना चाहते हैं, क्योंकि उन्होंने सुन रखा है कि वे 'ऑन द स्पॉट' (मौके पर ही) एक्शन ले लेते हैं, शायद इसी तरह उनकी इस गंभीर समस्या का भी कोई समाधान निकल सके।

🌧️ नई बिल्डिंग तैयार होने के बावजूद जर्जर क्लासरूम में बैठने को मजबूर बच्चे

शहडोल जिला मुख्यालय के एक्सीलेंस स्कूल (रघुराज क्रमांक-2) के 11वीं कक्षा के छात्र-छात्राएं कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर से मिलने की जिद करने लगे। हालांकि शुक्रवार को 'जनविश्वास अभियान' के तहत कलेक्टर सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारी फील्ड में थे, इसलिए बच्चों की सीधी मुलाकात नहीं हो पाई, जिसके बाद उन्होंने अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। 11वीं की छात्रा तमन्ना निशा सारी और निहारिका बंसल ने दर्द साझा करते हुए बताया कि स्कूल की नई बिल्डिंग बनकर पूरी तरह तैयार है, लेकिन उन्हें उसमें बैठने नहीं दिया जा रहा है। उन्हें ऐसी जर्जर कक्षाओं में बैठाया जा रहा है जहाँ छत की सीलिंग से लगातार पानी टपकता है, बेंच पर पानी भरा रहता है और चारों तरफ गंदगी फैली रहती है।

🛑 ठेकेदार द्वारा बिल्डिंग न सौंपने का आरोप, बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित

स्कूल की एक अन्य छात्रा सरस्वती यादव ने बताया कि जब क्लासरूम में बैठने की उचित व्यवस्था ही नहीं होगी, तो वे पढ़ाई कैसे कर पाएंगे। कभी बच्चों को हॉल में तो कभी किसी अन्य कमरे में शिफ्ट करके जैसे-तैसे क्लास एडजस्ट की जा रही है। छात्रों का कहना है कि जब इस बारे में शिक्षकों से पूछा जाता है, तो उनका जवाब होता है कि संबंधित ठेकेदार द्वारा अभी तक नई बिल्डिंग स्कूल को हैंडओवर नहीं की गई है। इसी मुख्य समस्या को लेकर बच्चे गुहार लगाने कलेक्ट्रेट पहुँचे थे ताकि उन्हें जल्द से जल्द नई बिल्डिंग में जगह मिल सके और उनकी पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके।

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