Spiritual Program in Indore Jail: अपराध से तौबा कर धर्म के मार्ग पर चल रहे कैदी, जज द्वारा जेल में हो रहा सुंदरकांड का पाठ
इंदौर सेंट्रल जेल में पहली बार एक रिटायर्ड जज द्वारा कैदियों को रामायण का सुंदरकांड सुनाया जा रहा है। इस संगीतमय आयोजन में 1500 से अधिक कैदी शामिल हैं।
संगीन अपराधों और जुर्म के मामलों में अदालत के जज द्वारा कैदियों को जेल भेजने की खबरें तो आम हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर से एक ऐसी अनूठी और सकारात्मक पहल सामने आई है जो अपने आप में मिसाल है। इंदौर में पहली बार एक रिटायर्ड जज जेल के अंदर पहुंचकर कैदियों को रामायण का सुंदरकांड सुना रहे हैं। इस खास आयोजन की शुरुआत जेल अधीक्षक की पहल पर की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य कैदियों को अपराध की दुनिया से दूर कर उन्हें धर्म, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति से जोड़ना है, ताकि वे आत्म-शुद्धि और आत्म-मंथन कर सकें।
📖 जेल के अंदर बनाई गई विशेष व्यास गादी, संगीतमय व्याख्यान से सुधर रही कैदियों की सोच
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पूर्व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश और आध्यात्मिक विद्वान श्री अरुण जी ने इंदौर सेंट्रल जेल के अधीक्षक दिनेश नरगावे को संगीतमय व्याख्यान एवं सुंदरकांड के पाठ का आयोजन कराने की पेशकश की थी, जिसे जेल अधीक्षक ने तुरंत स्वीकार कर लिया। इसके बाद शनिवार का दिन तय किया गया और जेल परिसर के अंदर ही विद्वान वक्ता के लिए एक विशेष व्यास गादी तैयार की गई। पूर्व जज अरुण जी को सुंदरकांड का पाठ करने का गहरा अनुभव है और उन्हें इस क्षेत्र में कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं। खास बात यह है कि वह इस नेक कार्य के लिए कोई फीस या आने-जाने का खर्च नहीं लेते हैं। उनकी विशेष इच्छा थी कि जेल के कैदियों को भी धर्म और अध्यात्म की अनुभूति कराई जाए।
🌸 कैदियों को बांटी गईं सुंदरकांड की पुस्तिकाएं, 1500 से ज्यादा बंदी कर रहे हैं श्रवण
आयोजन के दौरान जेल में मौजूद सभी कैदियों को सुंदरकांड की विशेष पुस्तिकाएं भेंट की गईं, जिसके बाद संगीतमय पाठ का शुभारंभ हुआ। इस दौरान वक्ता अरुण जी ने कैदियों को हमारी समृद्ध संस्कृति और धर्म का महत्व समझाया। उन्होंने सभी बंदियों का आह्वान करते हुए कहा कि बुरे कर्मों का परिणाम हमेशा बुरा होता है और उसकी सजा एक न एक दिन भुगतनी ही पड़ती है। इसलिए धर्म और नेकी के मार्ग पर चलना ही जीवन जीने का सबसे सही रास्ता है। जेल सुपरिंटेंडेंट दिनेश नरगावे ने बताया कि इस अनूठे और संगीतमय आयोजन में 1500 से अधिक कैदी पूरी श्रद्धा के साथ सुंदरकांड का पाठ सुन रहे हैं। प्रशासन का प्रयास है कि ऐसे आयोजनों से कैदियों का मनोबल बढ़े, उनमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो और वे जेल से बाहर निकलकर एक बेहतर इंसान बनकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
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