देवास में शिकारियों का पीछा करते हुए शहीद हुए वनरक्षक मदनलाल वर्मा को 5 साल बाद मिला शहीद का दर्जा

देवास में शिकारियों का पीछा करते हुए शहीद हुए उज्जैन के वनरक्षक मदनलाल वर्मा को 5 साल बाद शहीद का दर्जा मिला है। अब उनका परिवार मुआवजे और मकान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है।

Aug 25, 2026 - 19:46
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देवास में शिकारियों का पीछा करते हुए शहीद हुए वनरक्षक मदनलाल वर्मा को 5 साल बाद मिला शहीद का दर्जा

मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर के गढ़कालिका मार्ग निवासी वनरक्षक मदनलाल वर्मा को आखिरकार घटना के 5 साल बाद आधिकारिक रूप से शहीद का दर्जा मिल गया है। वे देवास जिले के पुंजापुरा वन क्षेत्र में 4 फरवरी 2021 को जंगल में शिकारियों और वन माफियाओं का पीछा करते हुए शहीद हो गए थे। करीब पांच साल बाद स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर उनकी पत्नी कृष्णा वर्मा को आधिकारिक तौर पर 'शहीद सम्मान पत्र' सौंपा गया और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया गया। मदनलाल वर्मा की शहादत के आखिरी 66 सेकंड का एक वीडियो उनके मोबाइल में रिकॉर्ड हुआ था, जो इस पूरी घटना का सबसे बड़ा सबूत बना था।

🏠 50 फीट से सिकुड़कर 15 फीट पर पहुंचा आशियाना, सड़क चौड़ीकरण की जद में आया शहीद का घर

एक तरफ जहाँ 5 साल बाद प्रशासन द्वारा शहीद का सम्मान मिलने से परिवार को कुछ राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ घर लौटते ही उनके सामने एक नया और बड़ा संकट खड़ा हो गया है। शहीद मदनलाल वर्मा की पत्नी कृष्णा वर्मा ने बताया कि उनका घर उज्जैन के गढ़कालिका मार्ग जानकी नगर में स्थित है, जो कभी 12/50 फीट का हुआ करता था, लेकिन अब शहर में चल रहे सड़क चौड़ीकरण की जद में आने के कारण मकान का अधिकांश हिस्सा टूटने की कगार पर है। नोटिस के अनुसार मकान का करीब 25 फीट हिस्सा तोड़ा जा रहा है, जिससे उनका आशियाना मात्र 12/15 फीट का ही बच जाएगा और परिवार के सामने सिर छिपाने का संकट पैदा हो गया है।

💰 1 करोड़ मुआवजे और मकान की घोषणा का अब भी इंतजार, परिवार ने लगाई गुहार

शहीद की पत्नी ने नम आँखों से बताया कि पति की शहादत के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि और आवास देने की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक उस वादे पर पूरी तरह अमल नहीं हुआ है। बेटे को अनुकंपा नौकरी तो मिल गई, लेकिन आर्थिक मदद और मकान की घोषणा पूरी होने का परिवार अब भी इंतजार कर रहा है। इसके अलावा रतनपुर चौकी में शहीद की प्रतिमा लगाने की बात भी अधूरी है। बहरहाल, 5 साल पहले ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले वनरक्षक के परिवार की उम्मीदें अब सरकार और प्रशासन से टिकी हैं कि उनके घर को टूटने से बचाया जाए और की गई घोषणाओं को पूरा किया जाए।

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