छिंदवाड़ा अस्पताल में लापरवाही जारी, क्षमता से अधिक बच्चों को एक ही वार्मर में रखने को मजबूर डॉक्टर

छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में वार्मर मशीन में आग लगने से बच्चे की मौत के बाद भी व्यवस्थाएं नहीं सुधरी हैं। एक ही वार्मर मशीन में तीन-तीन बच्चों को रखने को मजबूर हैं डॉक्टर।

Aug 25, 2026 - 14:49
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छिंदवाड़ा अस्पताल में लापरवाही जारी, क्षमता से अधिक बच्चों को एक ही वार्मर में रखने को मजबूर डॉक्टर

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल में नवजात शिशु गहन इकाई (NICU) वार्ड के वार्मर में शॉर्ट सर्किट से आग लगने और उसमें झुलसने के कारण एक मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत के बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है। अस्पताल की लापरवाही का आलम यह है कि जो वार्मर मशीन कायदे से केवल एक नवजात शिशु के लिए निर्धारित होती है, उसमें मजबूरी के नाम पर एक साथ तीन-तीन बच्चों को लिटाया जा रहा है। वर्तमान में जिला अस्पताल में कुल 20 वार्मर मशीनें ही उपलब्ध हैं, जबकि उनकी देखरेख में इस समय 63 नवजात बच्चों को रखा गया है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा फिर से हो सकता है।

🩺 इंचार्ज डॉक्टर की मजबूरी—मशीनों की भारी कमी के कारण एक साथ रखने पड़ रहे हैं बच्चे

इस गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए नवजात शिशु गहन इकाई के इंचार्ज डॉ. अंशुल लामा ने अपनी विवशता जाहिर की है। उनका कहना है कि प्रत्येक मशीन में क्षमता से अधिक बच्चों को रखना उनकी मजबूरी है, क्योंकि मशीनों की भारी किल्लत है। अस्पताल में आने वाले हर नवजात को इलाज देना उनकी प्राथमिकता है, इसलिए उन्हें एक ही मशीन में तीन-तीन बच्चों को एडजस्ट करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि नई वार्मर मशीनों की मांग शासन स्तर पर भेजी जा चुकी है, लेकिन जब तक मांग पूरी नहीं होती, तब तक इसी तरह जोखिम उठाकर काम चलाना पड़ रहा है। डॉक्टर के अनुसार, वार्मर मशीन एक ऐसा संवेदनशील चिकित्सा उपकरण है जिसका उपयोग समय से पहले जन्मे (Premature) या बेहद कम वजन वाले बच्चों के शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने के लिए किया जाता है, क्योंकि जन्म के बाद नवजात खुद के शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं कर पाते।

🔥 22 अगस्त को छिंदवाड़ा और 24 अगस्त को अमरावती में हुई थी दिल दहला देने वाली आग की घटनाएं

गौरतलब है कि गत 22 अगस्त को छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के इसी एसएनसीयू (SNCU) वार्ड में वार्मिंग मशीन के फिलामेंट में स्पार्किंग और तकनीकी खराबी के कारण अचानक भीषण आग लग गई थी। इस दर्दनाक हादसे में 3 मासूम बच्चे बुरी तरह झुलस गए थे, जिन्हें तुरंत बेहतर इलाज के लिए जबलपुर के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रेफर किया गया था, जहाँ इलाज के दौरान एक बच्चे ने दम तोड़ दिया था। इस भयानक हादसे की गूंज अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि ठीक उसके दो दिन बाद यानी 24 अगस्त को महाराष्ट्र के अमरावती में भी ऐसी ही एक दुखद घटना सामने आई, जहाँ एनआईसीयू वार्ड में आग लगने से 3 नवजात बच्चों की मौत हो गई थी। इसके बावजूद छिंदवाड़ा अस्पताल प्रबंधन द्वारा पुख्ता इंतजाम न किया जाना बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।

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