मध्य प्रदेश में पराली जलाने के मामलों में भारी उछाल, अप्रैल-मई 2026 में देश में सबसे ज्यादा 36,000 से अधिक घटनाएं दर्ज

मध्य प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही हैं। अप्रैल से मई 2026 के बीच प्रदेश में देश सर्वाधिक 36 हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है।

Aug 26, 2026 - 09:46
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मध्य प्रदेश में पराली जलाने के मामलों में भारी उछाल, अप्रैल-मई 2026 में देश में सबसे ज्यादा 36,000 से अधिक घटनाएं दर्ज

मध्य प्रदेश में पराली (फसल अवशेष) जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए भले ही कड़े दंड, अर्थदंड और प्रशासनिक प्रावधान किए गए हों, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। स्थिति यह है कि प्रदेश में पराली जलाने की घटनाएं कम होने के बजाय लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से मई 2026 के बीच देश भर में सर्वाधिक 36 हजार से अधिक घटनाएं अकेले मध्य प्रदेश में दर्ज की गईं। इस खतरनाक ट्रेंड के कारण न सिर्फ पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि मिट्टी के प्राकृतिक पोषक तत्व भी तेजी से नष्ट हो रहे हैं, जिस पर केंद्र सरकार ने भी गहरी चिंता जताई है।

📊 विदिशा और रायसेन बने सबसे बड़े हॉटस्पॉट, छिंदवाड़ा में भी तेजी से बढ़े आंकड़े

सामने आए आंकड़ों के अनुसार, अकेले अप्रैल से मई 2026 के दो महीनों में किसानों द्वारा खरीफ फसल की बोवनी से पहले खेत साफ करने के लिए बड़े पैमाने पर पराली जलाई गई। इसमें अकेले विदिशा जिले में रिकॉर्ड 4,465 मामले सामने आए, जबकि रायसेन में 3,205, सिवनी में 3,157 और उज्जैन में 2,444 घटनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा छिंदवाड़ा में भी यह ग्राफ तेजी से ऊपर गया है, जहाँ वर्ष 2025 में 714 मामले थे, जो बढ़कर 2026 में 1,925 तक पहुँच गए। नर्मदापुरम, गुना और सागर समेत कई अन्य जिलों में भी फसल कटाई के बाद खेतों में आग लगाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

🚜 जागरूकता और पुलिस कार्रवाई भी बेअसर, सरकार दे रही है कृषि यंत्रों पर अनुदान

प्रशासन, कृषि, राजस्व और पर्यावरण विभाग लगातार किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान चला रहा है और कई जगहों पर पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ पुलिस में प्रकरण भी दर्ज किए गए हैं। इसके बावजूद मामलों में कमी नहीं आई है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि सरकार द्वारा पराली प्रबंधन के लिए रीपर, सुपर सीडर, मल्चर, बेलर और क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट सिस्टम जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों पर भारी अनुदान दिया जा रहा है, ताकि किसान आग लगाने के बजाय इनका उपयोग करें। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2022 में जहाँ 27,759 घटनाएं थीं, वहीं 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 39,165 तक पहुँच गया है, जो गंभीर चिंता का विषय है।

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