क्या पूरा हो पाएगा इस बार बारिश का कोटा? जानें पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के ताजा आंकड़े

मध्य प्रदेश में भारी बारिश के बावजूद अभी तक औसत कोटे की 68% बारिश ही हुई है। मौसम विभाग ने कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट जारी किया है। जानें पूरी रिपोर्ट।

Aug 26, 2026 - 17:21
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क्या पूरा हो पाएगा इस बार बारिश का कोटा? जानें पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के ताजा आंकड़े

मध्य प्रदेश में इन दिनों भारी बारिश का दौर लगातार जारी है, ऐसे में हर किसी के मन में यही बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या इस बार बारिश का कोटा पूरा हो पाएगा? वर्तमान परिस्थितियों को अगर देखें तो प्रदेश में इतनी जोरदार बारिश के बावजूद अभी तक औसत कोटे की केवल 68 प्रतिशत बारिश ही दर्ज की जा सकेगी। मध्य प्रदेश में सामान्य तौर पर पूरे सीजन में करीब 44 इंच बारिश होती है, लेकिन 25 अगस्त तक मात्र 25.5 इंच बारिश ही रिकॉर्ड की गई है। अब सवाल यह है कि इतनी जबरदस्त बारिश के बाद भी बारिश का कुल आंकड़ा कम क्यों नजर आ रहा है? आइए इसके पीछे की वजह जानते हैं। मध्य प्रदेश में बारिश का औसत कम होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि इस सीजन में एक जैसी बारिश हर जगह नहीं हुई है। पहले जहां मानसून की बेरुखी देखने को मिली, वहीं अगस्त के महीने में कहीं बहुत कम तो कहीं बेहद ज्यादा बारिश हो गई। जब पूरे प्रदेश का कुल औसत निकाला गया, तो यह चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई।

📊 मानसून की वर्तमान स्थिति और अगस्त तक के आंकड़े

मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, प्रदेश में एक्टिव वेदर सिस्टम लगातार वर्षा करा रहा है। इस सीजन में अब तक प्रदेश में औसत 25.5 इंच (648.7 मिमी) बारिश दर्ज हो चुकी है, जो कुल कोटे का करीब 68 प्रतिशत है। हालांकि, सामान्य वर्षा के 28.6 इंच के मुकाबले यह आंकड़ा अभी भी 3.1 इंच यानी 11 प्रतिशत कम है। मौसम विशेषज्ञ का यह भी कहना है कि मध्य प्रदेश में बारिश का वितरण असमान रहा है। अब तक पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 7 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि पश्चिमी हिस्सों में यह कमी 14 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके अलावा, अगस्त के अंतिम दिनों तक भी प्रदेश के 40 जिलों में कम पानी गिरा है, जबकि केवल 15 जिलों में ही सामान्य या उससे ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की जा सकी है।

🏛️ मध्यप्रदेश के बड़े शहरों में बारिश के ऐतिहासिक रिकॉर्ड

मौसम विभाग भोपाल के अनुसार, मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में अगस्त के महीने में अतीत में कई बार भारी बारिश दर्ज की गई है। भोपाल और उज्जैन में वर्ष 2006 के दौरान अगस्त माह में करीब 35 इंच बारिश का ऑल-टाइम रिकॉर्ड दर्ज हुआ था। वहीं, जबलपुर में 102 साल पहले यानी वर्ष 1923 में अगस्त महीने में 44 इंच वर्षा हुई थी, जहां 20 अगस्त को महज 24 घंटे के भीतर 13 इंच पानी बरस गया था। इसी तरह ग्वालियर में 10 अगस्त 1927 को एक ही दिन में साढ़े 8 इंच बारिश का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना था। आंकड़ों के मुताबिक, जबलपुर में इस महीने का औसत 18 इंच और भोपाल में सामान्य तौर पर 14 दिन बारिश का रहता है।

⚠️ अभी उम्मीद बाकी है: मौसम विभाग ने जारी किया भारी बारिश और वज्रपात का अलर्ट

मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश में अगले तीन दिनों के लिए भारी वर्षा, बिजली गिरने और तेज आंधी-तूफान का ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। खासकर उत्तरी, पश्चिमी और मध्य हिस्सों में मानसून की सक्रियता के चलते अगले 24 से 48 घंटों के दौरान कई जिलों में मूसलाधार पानी गिरने की संभावना है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी और आकाशीय बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा। ऐसे में नागरिकों को सतर्क रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की हिदायत दी गई है। मौसम की इस सक्रियता को देखते हुए उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में बारिश का कोटा कुल औसत के और अधिक करीब पहुंच सकता है।

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