इसरो और स्पेस किड इंडिया के विशेष प्रशिक्षण में शामिल हुईं दर्शना, दिल्ली में सीख रही हैं सैटेलाइट तकनीक
इंदौर की गरीब बस्ती में रहने वाली दर्शना शर्मा का चयन अंतरिक्ष विज्ञान के विशेष प्रशिक्षण के लिए हुआ है। वे दिल्ली में सैटेलाइट निर्माण की ट्रेनिंग ले रही हैं।
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर की एक साधारण और गरीब बस्ती में रहने वाली बेटी दर्शना शर्मा ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर एक मिसाल कायम की है। दर्शना का चयन अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए हुआ है, और वे इस प्रोजेक्ट के तहत मध्यप्रदेश से चुनी जाने वाली एकमात्र प्रतिभागी हैं। चेन्नई स्थित प्रतिष्ठित संस्था 'स्पेस किड इंडिया' द्वारा बस्तियों में रहने वाली बालिकाओं को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ने और उन्हें इस अत्याधुनिक क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने के लिए प्रेरित करने के वास्ते इस विशेष मिशन की शुरुआत की गई थी। इस महत्वाकांक्षी मिशन के तहत भारत समेत दुनिया के 108 देशों से लगभग 12,000 बच्चियों ने हिस्सा लिया था, जिनमें से कड़ी चयन प्रक्रिया के बाद भारत के 20 राज्यों से एक-एक बेटी को चुना गया है।
🎓 वर्चुअल शिक्षा से लेकर इंटरव्यू तक: कड़े चरणों को पार कर चुनी गईं दर्शना
शुरुआती चरण में मध्य प्रदेश से कुल 15 बच्चियों ने इस अभियान में भाग लिया था। सभी प्रतिभागियों को वर्चुअल माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान की गहन सैद्धांतिक शिक्षा दी गई। इसके बाद विज्ञान की बुनियादी समझ, विषय के प्रति गहरी रुचि और साक्षात्कारों (इंटरव्यू) के आधार पर चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। विभिन्न चरणों को पार करते हुए अंतिम रूप से प्रत्येक देश और भारत के चुनिंदा राज्यों से एक-एक मेधावी छात्रा का चयन किया गया, जिसमें मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व इंदौर की दर्शना शर्मा कर रही हैं।
🛰️ दिल्ली की गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में विशेष प्रशिक्षण: इसरो के वैज्ञानिकों का मिल रहा मार्गदर्शन
'मिशन शक्ति सैट' के दूसरे चरण के तहत दिल्ली स्थित गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर चयनित बालिकाओं का विशेष प्रशिक्षण शिविर शुरू हुआ है। 23 अगस्त से शुरू हुई यह ट्रेनिंग 30 अगस्त तक अनवरत जारी रहेगी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और विभिन्न देशों से आए अंतरिक्ष विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में ये बच्चियां एक महत्वपूर्ण सैटेलाइट परियोजना पर मिलकर काम कर रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान इन्हें पेलोड तैयार करने की कला, सैटेलाइट की कार्यप्रणाली, उसकी कक्षा (ऑर्बिट), अंतरिक्ष से डाटा प्राप्त करने के तरीके और कृषि जैसे क्षेत्रों में स्पेस टेक्नोलॉजी के व्यावहारिक उपयोग की बारीकियां सिखाई जा रही हैं।
⏳ 120 घंटे की ऑनलाइन ट्रेनिंग के बाद मिल रही 'हैंड्स-ऑन' ट्रेनिंग: 11 अक्टूबर को लॉन्चिंग की योजना
इस मिशन की इंडियन एंबेसडर और रिटायर्ड विंग कमांडर जया तारे ने जानकारी दी कि चयनित छात्राओं को पहले ही 120 घंटे से अधिक की कठोर ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जा चुकी है। अब उन्हें भौतिक रूप से 'हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग' के जरिए सैटेलाइट में उपयोग होने वाले उपकरणों, सामग्री और उन्नत तकनीक से रूबरू कराया जा रहा है। दुनिया के अलग-अलग कोनों से आए वैज्ञानिक इन बेटियों को सैटेलाइट निर्माण के हर एक पहलू को समझा रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान इन छात्राओं द्वारा तैयार किए जा रहे पेलोड को मुख्य सैटेलाइट में शामिल किया जाएगा। इसके बाद वैज्ञानिकों की देखरेख में इसकी अंतिम असेंबली पूरी होगी, जिसे आगामी 11 अक्टूबर को 'अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस' के खास मौके पर अंतरिक्ष में लॉन्च किए जाने की योजना है।
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