बैगा बाहुल्य परसवाड़ा और बिरसा में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, 4 साल के बच्चे की मौत के बाद आक्रोश

बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बच्चों की लगातार हो रही मौतों से हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर चक्का जाम किया।

Aug 27, 2026 - 18:47
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बैगा बाहुल्य परसवाड़ा और बिरसा में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, 4 साल के बच्चे की मौत के बाद आक्रोश

बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बाहुल्य बिरसा और परसवाड़ा क्षेत्र में मासूम बच्चों की लगातार हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले कुछ महीनों से शुरू हुआ यह त्रासद दौर लगातार जारी है, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैली हुई है। धामनगांव की 4 वर्षीय माही मरकाम की मौत का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब मोहनपुर पंचायत के बैगाटोला गांव में 4 वर्षीय लवकुश की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक अलग-अलग गांवों में कुल 27 बच्चों की जान जा चुकी है, लेकिन मौतों के असली कारणों का खुलासा अब तक नहीं हो सका है।

🛑 मातला से लेकर बैगाटोला तक: 24 से बढ़कर 27 पहुंचा मौतों का आंकड़ा

बच्चों की मौतों का यह सिलसिला सबसे पहले 18 मई को मातला गांव से शुरू होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद मातला, चिखली खेरटोला, बोंदारी, मछुलदा, कोण्डेकसा, कोरका, कोटबीर कोना, गटिया और तेंदूडही समेत कई गांवों से लगातार बच्चों की मौत के मामले सामने आते रहे। 18 अगस्त तक यह आंकड़ा करीब 24 तक पहुंचा था, जो अब बढ़कर 27 तक पहुंच चुका है। प्रशासन की ओर से प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर जांच और उपचार के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन लगातार उफनते इस मौत के आंकड़े ने अभिभावकों और स्थानीय लोगों के मन में गहरा डर पैदा कर दिया है।

⚰️ अंतिम संस्कार को लेकर विवाद और परिजनों की गैरमौजूदगी के आरोप

हाल ही में जान गंवाने वाले 4 वर्षीय लवकुश के मामले में स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब ग्रामीण और आदिवासी विकास परिषद सामने आए। परिषद के अध्यक्ष दिनेश धुर्वे का दावा है कि बच्चे की मौत मलेरिया के कारण हुई है, हालांकि आधिकारिक चिकित्सकीय पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब बच्चे के माता-पिता रोजगार के सिलसिले में बाहर (हैदराबाद) गए हुए थे, तब संक्रमण का हवाला देकर प्रशासन ने कथित तौर पर जल्दबाजी में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करवा दी। हालांकि, परसवाड़ा एसडीएम श्रीश प्यासी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि अंतिम संस्कार बच्चे के दादा द्वारा किया गया था और प्रशासन ने कोई दबाव नहीं बनाया, बल्कि अन्य बीमार बच्चों को तुरंत अस्पताल भेजना प्राथमिकता थी।

🚧 बालाघाट-बैहर मार्ग पर चक्का जाम: निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े ग्रामीण

लवकुश की मौत और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से नाराज ग्रामीणों और आदिवासी समाज का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने बंजारी तिराहे पर बालाघाट-बैहर मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर दिया और सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सिर्फ स्वास्थ्य कैंप लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इन 27 बच्चों की मौत के पीछे की वास्तविक और निष्पक्ष चिकित्सकीय जांच कराई जाए तथा दोषी लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। लगातार हो रही इन मौतों ने सरकार और स्वास्थ्य तंत्र की तैयारियों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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