भोपाल में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, मिलावटी मिठाई बनाने वाली फैक्ट्री से पैकेट किए गए सीज
मध्य प्रदेश में मिलावटी मिठाई, मावा और घी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी लगातार जारी है। एक महीने में 11 क्विंटल से अधिक मिलावटी उत्पाद जब्त किए गए हैं।
पैकिंग में चमकती हुई स्वादिष्ट मिठाइयां, शुद्ध दिखने वाला घी और लजीज पनीर आपकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। त्योहारी सीजन के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा विभाग ने मध्य प्रदेश भर में ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी है, जिसमें नए-नए ब्रांड नेम से बाजार में खपाए जा रहे मिलावटी खाद्य पदार्थों का भंडाफोड़ हुआ है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इनमें से अधिकांश मिलावटी सामान पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र और गुजरात से आ रहा है। उत्तर प्रदेश के बाद अब मध्य प्रदेश में भी मिलावटखोरों के खिलाफ शिकंजा कसा जा रहा है, और पिछले एक महीने के भीतर राज्य में 11 क्विंटल से अधिक मिलावटी खाद्य सामग्री जब्त की जा चुकी है।
📦 छोटे अक्षरों में लिखी होती है सामग्री: भोपाल की कंपनी से 114 किलो संदेहास्पद मिठाई जब्त
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बुधवार को राजधानी भोपाल के सीहोर रोड स्थित 'साई मावा ट्रेडिंग कंपनी' का औचक निरीक्षण किया। यहाँ रक्षाबंधन के पावन पर्व पर भोपाल और सीहोर की दुकानों पर सप्लाई करने के लिए हलवा, बर्फी और अन्य मिठाइयों के पैकेट तैयार किए गए थे। जब अधिकारियों ने पैकेट पर छपे विवरण को बारीकी से पढ़ा, तो पाया कि बहुत ही सूक्ष्म (छोटे) अक्षरों में सामग्री का उल्लेख किया गया था। इस मिठाई को बनाने में मिल्क सॉलिड्स (मिल्क पाउडर), हाइड्रोजेनेटेड ऑयल और रिफाइंड पामोलिन ऑयल (ताड़ का तेल) का इस्तेमाल किया जा रहा था। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ऐसी 114 किलोग्राम मिठाइयों को जब्त कर लिया और उनके सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए।
🧈 घी से लेकर पनीर तक सब मिलावटी: 25 से अधिक ब्रांड्स असुरक्षित घोषित
खाद्य सुरक्षा अधिकारी पंकज श्रीवास्तव के मुताबिक, त्योहारों के समय मिठाइयों की भारी मांग को देखते हुए बड़े पैमाने पर बाहर से मावा, पनीर, मिल्क केक और घी मंगाया जा रहा है। बाजार में अजीबोगरीब और नए नामों से घी के ब्रांड बेचे जा रहे हैं, जिनमें से करीब 25 घी के ब्रांड जांच के दौरान असुरक्षित पाए गए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के कमिश्नर मनोज पुष्प ने बताया कि पहले ग्वालियर-चंबल संभाग से दूध उत्पाद आते थे, लेकिन अब दूसरे राज्यों से मिलावटी घी और मावा आ रहा है। इस पर रोक लगाने के लिए महाराष्ट्र और गुजरात के खाद्य सुरक्षा विभागों को भी पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई का आग्रह किया गया है।
⚠️ क्या कहती है डाइटिशियन की सलाह? पैक्ड फूड खरीदने से पहले रखें सावधानी
सीनियर डाइटीशियन डॉ. अमिता सिंह का कहना है कि आज के समय में पैक्ड फूड्स का चलन बहुत बढ़ गया है, लेकिन लोग खरीदते वक्त यह पढ़ना जरूरी नहीं समझते कि उसमें क्या-क्या मिला है। कंपनियां भी उपभोक्ताओं को भ्रमित करने के लिए इंग्रेडिएंट्स के अलग-अलग तकनीकी नाम लिख देती हैं—जैसे मिल्क पाउडर को 'मिल्क सॉलिड्स' और पाम ऑयल को 'रिफाइंड पामोलिन'। इसी तरह 'शुगर फ्री' उत्पादों में माल्टोडोक्सट्रिन या डेक्सट्रोज मिलाया जाता है, जो चीनी का ही दूसरा रूप है। मिठाइयों में असली दूध के बजाय मिल्क पाउडर के इस्तेमाल से शरीर में तेजी से कैलोरी, शुगर और फैट बढ़ता है, जबकि पाम ऑयल और हाइड्रोजेनेटेड ऑयल (डालडा) से शरीर में ट्रांस फैट और बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जिससे हृदय रोग (हार्ट डिसीज) का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है।
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