पिछले साल के मुकाबले इस साल सिर्फ 34 फीसदी जलभराव, रबी सीजन की फसलों पर मंडराया बड़ा खतरा
कम बारिश के चलते नीमच जिले के जलस्त्रोतों में मात्र 34 प्रतिशत पानी ही बचा है, जिससे 17 तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं और किसानों की चिंता बढ़ गई है।
मध्य प्रदेश के एक तरफ जहां कई जिलों में भारी बारिश से नदियां उफान पर हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ जिले पर्याप्त पानी को तरस रहे हैं। मालवा क्षेत्र का नीमच जिला इस समय गंभीर कम बारिश (अतिवृष्टि के विपरीत सूखा) के दौर से गुजर रहा है। जिले में 2 सितंबर तक मात्र 22 इंच बारिश ही दर्ज की गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 41 इंच पानी बरस चुका था यानी पिछले साल की तुलना में इस साल अब तक केवल 50 फीसदी ही बारिश हुई है। इस कम बारिश का सीधा और घातक असर जिले के बांधों, तालाबों और पेयजल स्त्रोतों पर पड़ रहा है, जहां वर्तमान में कुल जलभराव क्षमता का मात्र 34 फीसदी पानी ही जमा हो पाया है।
🌾 खरीफ की फसल को फिलहाल राहत लेकिन रबी सीजन पर मंडराया खतरा, कई जिलों में अब भी अच्छे मानसूनी पानी का इंतजार
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक नीमच जिले के 39 प्रमुख जलस्त्रोतों की कुल क्षमता 83.25 एमसीएम है, जिसके मुकाबले इस बार सिर्फ 27.91 एमसीएम पानी ही संग्रहित हो सका है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 90 फीसदी यानी 75.27 एमसीएम था। हालात यह हैं कि जिले के 17 जलस्त्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं और ऐतिहासिक जीरन तालाब में भी मात्र 10 फीसदी पानी ही बचा है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल खरीफ फसल को थोड़ी राहत है, लेकिन यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो रबी सीजन में सिंचाई के लिए पानी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इसके अलावा अलीराजपुर और धार सहित प्रदेश के करीब एक दर्जन जिलों में भी औसत से काफी कम बारिश दर्ज की गई है।
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