क्रूड ऑयल की तेजी और एफआईआई की बिकवाली से क्या रहेगा बाजार का हाल, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

अमेरिका के नए रूसी तेल प्रतिबंध, 100% टैरिफ और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच आने वाले हफ्ते में कैसा रहेगा शेयर बाजार का हाल।

Sep 20, 2026 - 20:37
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क्रूड ऑयल की तेजी और एफआईआई की बिकवाली से क्या रहेगा बाजार का हाल, पढ़ें पूरी रिपोर्ट

भले ही पिछले हफ्ते का आखिरी कारोबारी दिन शेयर बाजार हरे निशान पर बंद हुआ हो, लेकिन आने वाले हफ्ते में मार्केट पर चौतरफा दबाव देखने को मिल सकता है. इसकी मुख्य वजह कई अंतरराष्ट्रीय कारण हैं, जिनमें सबसे बड़ा मुद्दा अमेरिका की ओर से रूसी तेल पर नया कानून और कड़े प्रतिबंध लगाना है. भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है, ऐसे में नए अमेरिकी प्रावधानों के तहत रूसी तेल इंपोर्ट करने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का खतरा मंडरा रहा है. साथ ही, कच्चे तेल की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं और जियोपॉलिटिकल टेंशन में भी कोई कमी नहीं आ रही है.

📈 2. गोल्डमैन सैक्स और जेपी मॉर्गन की चेतावनी— मिडिल ईस्ट तनाव और शिपिंग बाधाओं से 120 डॉलर तक पहुंच सकता है क्रूड ऑयल

शुक्रवार को लगातार तीसरे सेशन में तेल की कीमतों में हल्की नरमी जरूर आई, लेकिन आउटलुक बेहद अनिश्चित बना हुआ है क्योंकि क्रूड अभी भी 100 डॉलर से ऊपर है. सऊदी अरब के 'यानबू' एक्सपोर्ट हब पर क्रूड लोडिंग रुकने और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने से कीमतें चार महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं. गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि अगर मिडिल ईस्ट में जहाजों पर हमले और बढ़ते हैं, तो तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक उछल सकती हैं. इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट से कमोडिटी जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो रही है.

🇺🇸 3. डोनाल्ड ट्रंप ने साइन किया रूस प्रतिबंधों का बड़ा बिल, भारत-चीन जैसे बड़े खरीदारों पर मंडराया 100% टैरिफ का खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक बड़े पैकेज को कानून का रूप दे दिया है, जिसके तहत रूसी ऊर्जा के पांच सबसे बड़े खरीदारों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल गया है. “लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026” के तहत रूसी बैंकों, रक्षा क्षेत्रों और ‘शैडो फ्लीट’ (गुप्त बेड़े) के टैंकरों को निशाना बनाया गया है. दूसरी ओर, घरेलू बाजार में विदेशी निवेशक (FII) लगातार मुनाफावसूली कर रहे हैं और पिछले पांच हफ्तों में हजारों करोड़ रुपये निकाल चुके हैं, हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) लगातार खरीदारी कर बाजार को संभाले हुए हैं.

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