Tiger Death in Kanha: कान्हा में 19 दिनों तक चला इलाज, फिर भी नहीं बची बाघ की जान; विसरा जांच से होगा मौत का खुलासा

कान्हा टाइगर रिजर्व में नर बाघ की इलाज के दौरान मौत। कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के लक्षणों के चलते बाघ का हो रहा था उपचार। पार्क प्रशासन ने शुरू किया टीकाकरण अभियान।

Jun 24, 2026 - 18:32
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Tiger Death in Kanha: कान्हा में 19 दिनों तक चला इलाज, फिर भी नहीं बची बाघ की जान; विसरा जांच से होगा मौत का खुलासा

मंडला। कान्हा टाइगर रिजर्व से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है। मुक्की क्वारंटाइन सेंटर में पिछले 19 दिनों से उपचाराधीन एक नर बाघ ने मंगलवार को दम तोड़ दिया। बाघ को 4 जून को किसली परिक्षेत्र के संदूकखोल क्षेत्र से गंभीर रूप से बीमार हालत में रेस्क्यू किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, बाघ में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के लक्षण पाए गए थे, जिसके बाद उसे कड़ी निगरानी में रखा गया था।

🔬 मौत के कारणों की पुष्टि के लिए विसरा जांच

कान्हा टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र के सहायक संचालक आशीष पाण्डेय ने बताया कि रेस्क्यू के समय से ही वन्यजीव विशेषज्ञों और विभिन्न टाइगर रिजर्व के चिकित्सकों की सलाह पर उपचार किया जा रहा था। बाघ की उम्र लगभग 2-3 वर्ष थी। एनटीसीए (NTCA) के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए चिकित्सकों के दल ने पोस्टमार्टम किया और मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि के लिए विसरा नमूनों को प्रयोगशाला भेजा गया है। निर्धारित समिति की उपस्थिति में बाघ का भस्मीकरण कर दिया गया है।

🐕 वायरस के प्रसार को रोकने टीकाकरण अभियान

कैनाइन डिस्टेंपर वायरस को वन्यजीवों के लिए एक बड़ा खतरा माना जाता है। इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए कान्हा प्रशासन ने बफर क्षेत्र के कुत्तों का बड़े पैमाने पर टीकाकरण शुरू कर दिया है। आशीष पाण्डेय ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में किसी अन्य वन्यजीव में इस वायरस के लक्षण नहीं मिले हैं और स्थिति नियंत्रण में है। साथ ही बूस्टर डोज लगाने का कार्य भी निरंतर जारी है।

⚠️ बाघों के लिए क्यों खतरनाक है यह वायरस?

पशु चिकित्सक डॉ. अंकित मेश्राम ने बताया कि यह बीमारी मुख्य रूप से कुत्तों, सियार और लोमड़ियों से फैलती है। जब बाघ इन संक्रमित जानवरों का शिकार करते हैं, तो यह वायरस उनमें प्रवेश कर जाता है। यह बीमारी श्वसन, पाचन और तंत्रिका तंत्र पर सीधा हमला करती है। भारत के सरिस्का और कान्हा जैसे प्रमुख टाइगर रिजर्व में पहले भी इस संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं, जिसके बाद एनटीसीए द्वारा सुरक्षा के कड़े मानक निर्धारित किए गए हैं।

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