6 मिलीमीटर आकार और 70 मिलीग्राम वजन! नीमच में बनी दुनिया की सबसे सूक्ष्म गणेश कलाकृति
नीमच के जावद निवासी माइक्रो आर्टिस्ट राजेश सोनी ने मात्र 6 मिमी और 70 मिलीग्राम वजन के चांदी के सूक्ष्म अष्टविनायक गणेश जी की कलाकृति तैयार की है।
नीमच। इन दिनों पूरा देश गणेश उत्सव के पावन पर्व और धार्मिक आस्था में सराबोर है। इसी बीच मध्य प्रदेश के नीमच जिले के जावद कस्बे से कला और अध्यात्म का एक बेहद अनोखा व विहंगम संगम सामने आया है। स्थानीय प्रसिद्ध माइक्रो आर्टिस्ट (Micro Artist) राजेश सोनी ने शुद्ध चांदी धातु से भगवान गणेश के 'अष्टविनायक' स्वरूपों की अत्यंत सूक्ष्म और बारीक कलाकृति तैयार की है। इस पूरी कलाकृति का आकार मात्र 6 मिलीमीटर है और इसका कुल वजन केवल 70 मिलीग्राम दर्ज किया गया है। यह अष्टविनायक इतने सूक्ष्म हैं कि इन्हें चावल के एक single दाने या भगवान गणेश को अत्यंत प्रिय दूर्वा (दूब) घास के एक पत्ते पर आसानी से रखा जा सकता है।
🕉️ अष्टविनायक के आठों स्वरूपों का बारीक निरूपण: हल्दी, कुंकुम और अक्षत से सजाई गई कलाकृति
आर्टिस्ट राजेश सोनी द्वारा गढ़ी गई इस बेहद सूक्ष्म कलाकृति में भगवान गणेश के प्रसिद्ध आठों पौराणिक स्वरूपों को पूर्ण निष्ठा के साथ शामिल किया गया है।
इनमें श्री मयूरेश्वर, श्री सिद्धिविनायक, श्री बल्लालेश्वर, श्री वरदविनायक, श्री चिंतामणि, श्री गिरजात्मज, श्री विघ्नेश्वर और श्री महागणपति के पावन रूप प्रदर्शित किए गए हैं। इन नन्हीं और दिव्य मूर्तियों की सुंदरता व धार्मिक पवित्रता बढ़ाने के लिए प्राकृतिक हल्दी, कुंकुम और अक्षत का प्रयोग किया गया है। हरी-भरी दूर्वा पर विराजमान यह नन्हीं कलाकृति देखने में अत्यंत मनमोहक और आकर्षक प्रतीत होती है।
🔬 2 से 3 मिलीमीटर के बारीक हिस्सों की जोड़ाई: हल्की आंच पर साधे गए चांदी के पतले तार
ऐसी अकल्पनीय और सूक्ष्म कलाकृति का निर्माण करना बेहद जटिल, जोखिम भरा और अत्यधिक धैर्य मांगने वाला काम होता है।
कलाकार राजेश सोनी ने बताया, "अष्टविनायक के प्रत्येक स्वरूप को साकार करने के लिए 2 से 3 मिलीमीटर के अलग-अलग बारीक हिस्से बनाए गए। इसमें भगवान गणेश का सिर, सूंड, उदर, हाथ, पैर और सूप जैसे कान अलग-अलग तैयार किए गए। इसके बाद गैस की बेहद धीमी और हल्की आंच पर इन सभी सूक्ष्म हिस्सों को आपस में जोड़ा गया। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौती आंच के तापमान को नियंत्रित रखना था, क्योंकि थोड़ी सी भी तेज आंच चांदी के बेहद पतले तार को क्षण भर में पिघला सकती थी।"
🏆 पूर्व में भी कई विश्व रिकॉर्ड कर चुके हैं अपने नाम: अफीम डोडा, वर्ल्ड कप ट्रॉफी और ताजमहल भी बना चुके हैं राजेश
सूक्ष्म शिल्प कला के क्षेत्र में राजेश सोनी का यह कोई पहला प्रयोग नहीं है।
इससे पहले भी वे अपनी अद्भुत और बारीक कारीगरी का लोहा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनवा चुके हैं। वे दुनिया का सबसे छोटा सोने का अफीम डोडा, क्रिकेट वर्ल्ड कप की मिनी ट्रॉफी और सूक्ष्म ताजमहल जैसी अद्भुत कलाकृतियां गढ़ चुके हैं। इन वर्ल्ड क्लास रचनाओं के लिए उनका नाम प्रतिष्ठित विश्व रिकॉर्ड बुक्स में भी दर्ज हो चुका है। नीमच जिले में बनी यह नई गणेश कलाकृति इन दिनों कला प्रेमियों और श्रद्धालुओं के बीच कौतूहल व चर्चा का विषय बनी हुई है।
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