Mob Lynching Case Verdict: सिवनी मालवा कोर्ट के जज को वीडियो जारी कर मिली धमकी; धार्मिक टिप्पणी के बाद पुलिस ने दर्ज किया केस
नर्मदापुरम में मॉब लिंचिंग केस में सजा सुनाने वाली एडीजे को धमकी। आरोपियों को रिहा न करने पर कत्लेआम की चेतावनी। पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर केस दर्ज किया।
नर्मदापुरम। सिवनी मालवा के चर्चित मॉब लिंचिंग मामले में 14 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने वाली एडीजे तबस्सुम खान को सोशल मीडिया के माध्यम से जान से मारने और भड़काऊ धमकियां मिलने का मामला सामने आया है। सजा सुनाए जाने के बाद से ही सोशल मीडिया पर न्यायाधीश के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की जा रही हैं। सिवनी मालवा पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है।
📹 '10 दिन में रिहाई नहीं तो होगा कत्लेआम'
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में एक युवक को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि यदि 12 जून को सजा पाए 14 लोगों को 10 दिनों के भीतर रिहा नहीं किया गया, तो प्रदेश और देश में कत्लेआम किया जाएगा। इतना ही नहीं, आरोपी ने न्यायाधीश के प्रति धार्मिक आधार पर बेहद आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणियां भी की हैं। इस वीडियो के सामने आते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।
👮 पुलिस का एक्शन: स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज किया केस
थाना प्रभारी सुधाकर बारस्कर ने बताया कि यद्यपि एडीजे की ओर से कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है, लेकिन पुलिस ने वीडियो और पोस्ट की गंभीरता को देखते हुए स्वयं संज्ञान लिया है। 22 जून को दो अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आरोपियों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट्स की तकनीकी जांच कर रही है।
⚖️ क्या था पूरा मामला?
यह घटना 3 अगस्त 2022 की है, जब सिवनी मालवा के ग्राम बराखड़ में गो-तस्करी के संदेह में अमरावती (महाराष्ट्र) निवासी नाजिर अहमद की मॉब लिंचिंग में मौत हो गई थी। इस मामले में 12 जून 2026 को एडीजे तबस्सुम खान की अदालत ने फैसला सुनाते हुए सभी 14 आरोपियों को दोषी करार दिया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। फैसले के बाद से ही आरोपियों के समर्थकों द्वारा विरोध प्रदर्शन और धमकियां देने का सिलसिला शुरू हो गया है।
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