लोककला को बचाने की अनूठी पहल, सिख परिवेश से ताल्लुक रखने वाले देवेंद्र सिंह संवार रहे हैं बुंदेली और छत्तीसगढ़ी लोकगीत
जबलपुर के कलाकार देवेंद्र सिंह ग्रोवर के मार्गदर्शन में चलने वाला 'श्री जानकी बैंड' आज देश भर में अपनी पहचान बना चुका है। कोरोना काल में कॉलेज छात्राओं द्वारा शुरू किया गया था यह अनोखा बैंड।
मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर के जाने-माने लोक कलाकार देवेंद्र सिंह ग्रोवर इन दिनों अपनी अनूठी पहल और कला साधना के चलते खासे चर्चा में हैं। लोकनाट्य संस्था और 'श्री जानकी बैंड' के माध्यम से उन्होंने सैकड़ों युवा कलाकारों को नाटक और संगीत की ऐसी तालीम दी है कि आज उनके मार्गदर्शन में तैयार कई कलाकार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। खुद लोक कला में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने वाले देवेंद्र सिंह ने कई बड़े मंचों पर अभिनय किया है और अब वे जबलपुर के कलाकारों की एक पूरी नई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं। हाल ही में उनके द्वारा तैयार किए गए श्री जानकी बैंड की 'खूब लड़ी मर्दानी' प्रस्तुति सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई थी, जिसे लाखों लोगों ने सराहा।
🏛️ कोरोना काल में शुरू हुआ था छात्राओं का यह सफर, वाद्य यंत्रों से लेकर लोकसंगीत का दिया जा रहा है विशेष प्रशिक्षण
इस बैंड की शुरुआत कोरोना काल के मुश्किल दौर में हुई थी, जब कॉलेज और सार्वजनिक कार्यक्रम पूरी तरह बंद थे और छात्राएं अपने घरों में कैद थीं। तब देवेंद्र सिंह ग्रोवर और उनके साथियों ने इन छात्राओं को ऑनलाइन माध्यम से एक मंच पर जोड़ा, जो धीरे-धीरे एक सुव्यवस्थित बैंड का रूप ले लिया। आज यह बैंड सरकारी और गैर-सरकारी मंचों पर 500 से अधिक प्रस्तुतियां दे चुका है। सिख परिवार से ताल्लुक रखने वाले देवेंद्र ने बुंदेली और छत्तीसगढ़ी लोकगीतों व लोकनृत्यों को अपनी कला का मुख्य हिस्सा बनाया है। संस्था के जरिए अब तक 35 से अधिक कॉलेज छात्राओं को न केवल मंच और आर्थिक संबल मिला है, बल्कि उन्हें सरोद, वायलिन और गिटार जैसे आधुनिक वाद्य यंत्रों की भी बारीकी से शिक्षा दी जा रही है, ताकि आधुनिकता की दौड़ में हमारी पारंपरिक लोकसंस्कृति और लोकपरंपरा हमेशा जीवंत बनी रहे।
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