रीवा, सागर और जबलपुर संभाग की नई संभागीय रचना पर फैसला, निचले स्तर तक मजबूत होगा संगठन
जबलपुर प्रवास के अंतिम दिन सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की मौजूदगी में संघ की बैठक हुई। इसमें स्वयंसेवकों के आचरण और नई संभागीय रचना पर चर्चा की गई।
जबलपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अब अपने संगठनात्मक विस्तार के साथ-साथ स्वयंसेवकों के व्यक्तिगत आचरण, नैतिक मूल्यों और सामाजिक व्यवहार को अपनी कार्यपद्धति का मुख्य आधार बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के तीन दिवसीय जबलपुर प्रवास के अंतिम दिन सोमवार को श्रीराम इंजीनियरिंग कॉलेज परिसर में प्रांत कार्यकारिणी और विभाग टोली की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में संघ के विचारों को व्यावहारिक जीवन में उतारने, संगठनात्मक विकेंद्रीकरण को गति देने और कार्यकर्ताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपने को लेकर गहन मंथन किया गया।
🔍 संभागीय पुनर्गठन के तहत नवंबर के बाद दी जाएंगी नई जिम्मेदारियां: रीवा, सागर और जबलपुर संभागों में निचले स्तर तक मजबूत होगा संगठन
बैठक के दौरान संघ की नई संगठनात्मक संरचना पर प्रमुखता से चर्चा हुई। महाकौशल प्रांत को रीवा, सागर और जबलपुर संभाग में विभाजित कर बनाई गई नई संभागीय रचना को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में रूपरेखा तैयार की गई है। इस नई व्यवस्था के तहत आगामी नवंबर माह के बाद जिम्मेदार कार्यकर्ताओं को नए दायित्व सौंपे जाने की योजना है। संघ नेतृत्व का मुख्य उद्देश्य इस नई संभागीय व्यवस्था के जरिए संगठन की पहुंच को ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में एकदम निचले स्तर (जमीनी स्तर) तक मजबूत और सुव्यवस्थित करना है।
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