राष्ट्र सेविका समिति की जिला अध्यक्ष निर्मला ताई ने साझा किए आंकड़े, देशभर में चल रही 4,886 से ज्यादा शाखाएं
राष्ट्र सेविका समिति के 90 साल पूरे होने पर छिंदवाड़ा में 'प्रभाव से परिवर्तन' अभियान चलाया जा रहा है। जानिए संगठन के इतिहास और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका के बारे में।
राष्ट्रीय सेविका समिति के अपने स्थापना के 90 साल पूरे होने के अवसर पर देश भर में 'प्रभाव से परिवर्तन' की ओर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इस अभियान के तहत घरों में गृहस्थी संभालने वाली आम महिलाएं भी अब आगे आकर दूसरी महिलाओं को समाज सेवा और राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित कर रही हैं। इस अनुकरणीय संगठन की शुरुआत आज से 90 साल पहले महाराष्ट्र के वर्धा से हुई थी, जो वर्तमान समय में न केवल भारत बल्कि विदेशों तक में भारतीय संस्कृति और राष्ट्रहित के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
🏛️ 1936 में विजयादशमी के दिन हुई थी स्थापना: देश के 852 जिलों में संचालित हो रहे हैं संगठन के सेवा कार्य
राष्ट्र सेविका समिति की जिला इकाई की अध्यक्ष निर्मला ताई ने जानकारी देते हुए बताया कि संगठन के सालभर में पांच मुख्य आयोजन होते हैं, जिनमें विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व सबसे विशेष होता है क्योंकि इसी दिन वर्ष 1936 में लक्ष्मीबाई केलकर (जिन्हें प्यार से 'मौसीजी' कहा जाता है) ने नागपुर में इस संगठन की स्थापना की थी। वर्तमान में राष्ट्र सेविका समिति का कार्य देश के 852 जिलों तक फैल चुका है, जिसके अंतर्गत 4,886 शाखाएं, 1,173 मिलन और 1,332 सेवा कार्य सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की मानसिक, बौद्धिक और शारीरिक क्षमताओं का विकास कर उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए तैयार करना है।
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