हिंदू राष्ट्र को संगठित कर देश को शक्तिशाली बनाने का संकल्प, इंदौर में आयोजित हुआ 'चरैवेति एकत्रीकरण'
इंदौर में आयोजित आरएसएस के 'चरैवेति एकत्रीकरण' में शताब्दी वर्ष के कार्यों और भविष्य के लक्ष्यों पर मंथन किया गया। सह सरकार्यवाहक अतुल जी लिमये ने चुनौतियों का जिक्र किया।
इंदौर । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने गौरवशाली शताब्दी वर्ष में प्रवेश के साथ ही अगले 100 वर्षों के कार्यों, उपलब्धियों और भविष्य के लक्ष्य निर्धारण पर पूरी तरह जोर दे रहा है। इसी कड़ी में इंदौर में आयोजित ‘चरैवेति एकत्रीकरण’ कार्यक्रम में संघ के शताब्दी वर्ष के कार्यों पर व्यापक मंथन किया गया।
इस दौरान स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय सह सरकार्यवाहक अतुल जी लिमये ने कहा कि व्यक्ति निर्माण के साथ-साथ समाज के आचरण में सकारात्मक बदलाव लाना और हिंदू राष्ट्र को संगठित कर देश को शक्तिशाली बनाना हमारा मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के दौर में हमें समाज के सामने मौजूद विभिन्न आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का डटकर सामना करना होगा।
🎯 संघ के वर्तमान और भविष्य पर चर्चा: व्यक्तित्व निर्माण एक सतत और कठिन प्रक्रिया
इंदौर के इस महत्वपूर्ण एकत्रीकरण में संघ के 100 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा, उसकी उपलब्धियों और आने वाले समय के रोडमैप पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
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सतत प्रक्रिया: सह सरकार्यवाहक अतुल जी लिमये ने व्यक्तित्व निर्माण को एक कठिन और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया बताते हुए कहा कि संघ का कार्य केवल स्वयंसेवकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे समाज तक पहुँचकर उसे वैचारिक रूप से संगठित करना और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है।
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कार्यपद्धति का विस्तार: उन्होंने संघ की कार्यपद्धति, देश भर में शाखाओं के विस्तार और सामाजिक सहभागिता को और मजबूत करने पर जोर दिया। साथ ही, समाज में व्याप्त विषमताओं और कुप्रथाओं को दूर करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
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100 वर्षों का सिंहावलोकन: उन्होंने कहा कि संघ की 100 वर्षों की यात्रा का अवलोकन करना बेहद जरूरी है ताकि यह समझा जा सके कि हमने अब तक क्या हासिल किया है और भविष्य के कौन-कौन से लक्ष्य प्राप्त करने बाकी हैं।
👥 समाज के सभी वर्ग जुड़ सकते हैं संघ से, किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की नहीं है जरूरत
अतुल जी लिमये ने कहा कि संघ की स्थापना से लेकर अब तक व्यक्ति निर्माण की यह श्रृंखला लगातार आगे बढ़ती रही है। दैनिक शाखाओं के माध्यम से समाज में वैचारिक और सकारात्मक परिवर्तन लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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जुड़ने की सुगमता: शाखा से जुड़ने के लिए किसी भी प्रकार की विशेष शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं होती है। समाज के सभी वर्गों के लोग इसमें पूरी सहजता से भाग ले सकते हैं।
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विविध सेवा कार्य: आज कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक और विदेशों में भी संघ का राष्ट्र सेवा का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। कोरोना काल के कठिन दौर में भी स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर देशसेवा के कार्य किए थे।
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विभिन्न आयाम: प्रचार विभाग, विश्व संवाद केंद्र, धर्म जागरण, गोसेवा और कुटुंब प्रबोधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों के माध्यम से विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने चेताया कि यदि कोई भी संगठन अपनी उपलब्धियों से संतुष्ट होकर बैठ जाए, तो उसके निष्क्रिय होने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए शाखाओं की संख्या के साथ उनकी गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाना भी जरूरी है।
⚠️ विदेशी फंडिंग, धर्मांतरण और जनसंख्या असंतुलन सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौतियां
अपने संबोधन के दौरान अतुल जी ने सामाजिक विषमता, भ्रष्टाचार, नशे की प्रवृत्ति, सामाजिक विघटन और धर्मांतरण जैसी गंभीर समस्याओं पर गहरी चिंता व्यक्त की।
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प्रमुख चुनौतियां: उन्होंने कहा कि आज हमारे सामने कई नई रणनीतिक चुनौतियां खड़ी हैं, जैसे कि— कुछ विशेष क्षेत्रों में जनसंख्या असंतुलन, समाज के कुछ हिस्सों में ‘हम हिंदू नहीं हैं’ जैसा भ्रामक भाव पैदा करना, विदेशी फंडिंग के दम पर चलाए जा रहे प्रायोजित आंदोलन और तेजी से बढ़ता धर्मांतरण। इन सभी चुनौतियों का हमें वैचारिक और संगठनात्मक स्तर पर कड़ा जवाब देना होगा।
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राम मंदिर आंदोलन का उदाहरण: जन-जागरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक राम मंदिर निर्माण अभियान के दौरान महज 45 दिनों के भीतर करीब 14 करोड़ परिवारों और लगभग 70 करोड़ लोगों तक सीधा संपर्क साधा गया था, जिसमें अन्य तमाम समाजों के लोगों ने भी अभूतपूर्व सहभागिता निभाई थी। भविष्य में भी हमें समाज के शत-प्रतिशत लोगों तक अपनी पहुँच बनाने का लक्ष्य रखना चाहिए।
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